
एकीकृत शोध ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में दे सकता है महत्वपूर्ण योगदान: वीसी
फोटो- सीयूएसबी में कार्यक्रम में शामिल वीसी व अन्य। टिकारी, निज संवाददाता शोध में समय और स्थान का अत्यंत महत्व है। शोधकर्ताओं को समय की आवश्यकता के अन
शोध में समय और स्थान का अत्यंत महत्व है। शोधकर्ताओं को समय की आवश्यकता के अनुरूप कार्य करते हुए उद्देश्यों की पूर्ति करनी चाहिए। गुणवत्तापूर्ण शोध और वांछित परिणाम प्राप्त करने के लिए मेरे लिए अंग्रेजी भाषा के तीन ‘पी’ यानि पेशन्स (धैर्य), परसेवेरेंस (निरंतरता/दृढ़ता) और पैशन (जुनून) बहुत आवश्यक हैं। उक्त वक्तव्य दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने विभिन्न विभागों में नवप्रवेशित पीएचडी विद्यार्थियों के लिए आयोजित अभिमुखीकरण कार्यक्रम के दौरान कही। सीयूएसबी के अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) प्रकोष्ठ की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। कुलपति प्रो. केएन सिंह ने कहा कि यहां उपस्थित शिक्षक और विद्यार्थी विभिन्न विषयों (क्षेत्रों) से संबंधित हैं और उनके विचार भी विविध हैं।
मेरा मानना है कि विभिन्न विषयों के शोधार्थियों को साथ बैठकर सामूहिक रूप से कार्य करना चाहिए। उन्होंने विशेष बल देते हुए कहा कि एकीकृत शोध दृष्टिकोण और निष्कर्षों के माध्यम से शोधकर्ताओं को नवोन्मेषी परिणाम प्राप्त हो सकते हैं, जो ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। परिसर में अनुशासन बनाए रखने का आग्रह कार्यक्रम की शुरुआत में आर एंड डी प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. दुर्ग विजय सिंह ने विशिष्ट अतिथियों, संकायाध्यक्षों, विभागाध्यक्षों, शिक्षकगण एवं विभिन्न विभागों के शोधार्थियों का स्वागत किया। सीयूएसबी के जीवन विज्ञान विभाग के पीएम प्रोफेसर प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि शोध का रोडमैप कभी स्थिर नहीं होता, क्योंकि विश्व बहुत तेजी से बदल रहा है। डीएसडब्ल्यू प्रो. पवन कुमार मिश्रा छात्र कल्याण से जुड़ी बातें रखीं। प्रॉक्टर प्रो. प्रणव कुमार ने शोधार्थियों से परिसर में अनुशासन बनाए रखने का आग्रह किया। परीक्षा नियंत्रक डॉ. शांति गोपाल पाइन ने पीएचडी परीक्षा, मूल्यांकन तथा डिग्री प्रदान करने से संबंधित अन्य आवश्यक घटकों की जानकारी दी। कार्यक्रम में प्रो. रिजवानुल हक, प्रो. अशोक कुमार, प्रो. अतुल प्रताप सिंह, प्रो. जय प्रकाश सिंह, प्रो. के. शिव शंकर, डॉ. मंगलेश कुमार मंगलम आदि मौजूद रहें।

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