पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से गांवों की रफ्तार थमी, जरूरी सेवाएं ठप
पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से गांवों की रफ्तार थमी, जरूरी सेवाएं ठप -जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, पेंशन व राशन कार्ड से जुड़े कार्य प्रभावित -

पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल से गांवों की रफ्तार थम सी गई है। जरूरी सेवाएं ठप पड़ गई हैं। हड़ताल के चलते पंचायत स्तर पर मिलने वाली जरूरी सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने, पेंशन योजनाओं के निष्पादन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और राशन कार्ड से जुड़े कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। इससे फतेहपुर प्रखंड के आम ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में साफ तौर पर दिखने लगा है। सचिवों ने सरकार पर वादाखिलाफी, शिथिलता और उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए अपनी लंबित मांगों को लेकर हड़ताल जारी रखने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया है।
उनका कहना है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई, जिससे वे आंदोलन के लिए बाध्य हुए हैं। उनका कहना है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।पंचायत सचिवों की प्रमुख मांगों में अंतरजिला स्थानांतरण व्यवस्था लागू करना, शैक्षणिक योग्यता स्नातक करते हुए पदनाम बदलकर जीपीआरओ करना, ग्रेड पे 2000 से बढ़ाकर 4200 करना और 2000 रुपये परिवहन भत्ता देना शामिल है। इसके साथ ही बीपीआरओ पद पर प्रोन्नति में 55 वर्ष की आयु सीमा समाप्त करने, पंचायत योजनाओं में अभिकर्ता नहीं बनाए जाने तथा वैशाली जिले के निलंबित सचिवों की बहाली की मांग भी उठाई गई है।हड़ताल के कारण पंचायतों में चल रही विकास योजनाएं भी ठप पड़ गई हैं, जिससे ग्रामीण विकास की गति पर ब्रेक लग गया है। अब सबकी नजरें सरकार और सचिवों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं, ताकि जल्द समाधान निकल सके और ग्रामीण सेवाएं फिर से पटरी पर लौट सकें।
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