नई तकनीक से मातृ मृत्यु दर और गर्भावस्था संबंधी जटिलताओं में आएगी कमी
- एनीमिया से जूझ रहीं गर्भवतियों को मिलेगी राहत • -स्वास्थ्य कर्मियों को दिया गया
बोधगया के एक होटल में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में सरल इलाज पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें मध्यम और गंभीर एनीमिया से जूझ रहीं गर्भवतियों के उपचार को सरल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल शुरू की है। अब तक आयरन सुक्रोज इंजेक्शन की कई खुराकों के माध्यम से इलाज होता था। अब फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज इंजेक्शन की सिंगल डोज से ही प्रभावी उपचार संभव होगा। इससे समय की बचत के साथ ही उपचार की निरंतरता भी सुनिश्चित होगी। नई व्यवस्था को सफलतापूर्वक लागू करने के उद्देश्य से जिला स्वास्थ्य समिति, एम्स पटना और यूनिसेफ के संयुक्त तत्वावधान में गया जिले के 27 स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा पदाधिकारियों, जीएनएम और एएनएम के लिए तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए एम्स पटना के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. संजय पांडेय ने कहा कि गंभीर एनीमिया मातृत्व स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम है। लेकिन, समय पर सही उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज के उपयोग से गर्भवतियों को केवल एक बार स्वास्थ्य केंद्र आकर संपूर्ण उपचार मिल सकेगा। एम्स पटना के प्रोफेसर डॉ. संतोष निराला ने बताया कि इस प्रशिक्षण में स्वास्थ्य कर्मियों को आयरन सुक्रोज थेरेपी के सुरक्षित प्रबंधन के साथ-साथ फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज के उपयोग की विस्तृत तकनीकी जानकारी दी गयी है। यूनिसेफ के डॉ. संदीप घोष ने कहा कि यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी और मातृ मृत्यु दर और गर्भावस्था से जुड़ी जटिलताओं में कमी लाने में सहायक साबित होगी।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




