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न शहरी बने, न गांव के रह सके

हिन्दुस्तान टीम,गयाPublished By: Newswrap
Tue, 15 Jun 2021 10:00 PM
न शहरी बने, न गांव के रह सके

न शहरी बने, न गांव के रह सके

शेरघाटी नगर परिषद में शामिल आधा दर्जन गांवों की व्यथा

ग्राम पंचायतों से नहीं हो रहा विकास का काम, शहरी निकाय को है गाइडलाइन का इंतजार

फोटो न्यूज, शेरघाटी नगर परिषद में शामिल हुए अफजलपुर गांव की तस्वीर

शेरघाटी। निज संवाददाता

शेरघाटी नगर पंचायत को अपग्रेड कर नगर परिषद का दर्जा देने के लिए आस-पास की तीन अलग-अलग पंचायतों के आधा दर्जन से अधिक गांवों को शहरी क्षेत्र तो घोषित कर दिया गया, मगर हकीकत यह है कि ऐसे इलाके न शहरी बने, न गांव के रह सके। ऐसे इलाकों में करीब पंद्रह हजार आबादी रहती है। शहरी क्षेत्र में शामिल होने के कारण ऐसे इलाकों में पिछले छह माह से ग्राम पंचायतों की ओर से विकास का कोई कार्य नहीं किया गया है। शेरघाटी नगर परिषद की ओर से भी किसी विकास की बात तो दूर सफाई का काम भी नहीं हो रहा है।

पाठक अवगत हैं कि पिछले वर्ष दिसम्बर में बिहार सरकार की कैबिनेट में मंजूर एक प्रस्ताव के जरिए सूबे के दूसरे नगर निकायों के गठन और अपग्रेडेशन के साथ शेरघाटी नगर पंचायत को भी नगर परिषद का दर्जा मिला था।

गोपालपुर गांव के राधेश्याम सिंह, दीपक सिंह, सुजीत सिंह और जयराज सिंह आदि कहते हैं कि शहरी क्षेत्र में शामिल होने के कारण गोपालपुर में छह महीने से ग्राम पंचायत की ओर से कोई काम नहीं किया गया है। शहरी निकाय से भी कुछ नहीं हो रहा है। सफाई तक के लिए कोई कर्मी नहीं आता है। यही पीड़ा शहरी बने दूसरे गांवों की भी है।

शेरघाटी के एसडीओ उपेंद्र पंडित कहते हैं कि शहरी क्षेत्र में शामिल हुए गांवों के विकास के लिए सरकार की गाइडलाइन का इंतजार किया जा रहा है। श्रीरामपुर पंचायत के मुखिया कहते हैं कि जिस गांव को नगर परिषद में शामिल किया गया है, वहां विकास की नई योजनाओं के चालू करने की मनाही है। इधर नगर परिषद के उपमुख्य पार्षद चिंटू सिंह कहते हैं कि नए क्षेत्र में विकास के लिए अब तक कोई मार्ग निर्देश विभाग से प्राप्त नहीं हुआ है।

शेरघाटी नगर परिषद में शामिल हुए गांव

कमात

योगापुर

इस्माइलपुर

अफजलपुर

गोपालपुर

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