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हिंदी न्यूज़ बिहार गयागया के डुमरिया में नक्सलियों ने चार को मारा, फंदे से लटका मिला शव

गया के डुमरिया में नक्सलियों ने चार को मारा, फंदे से लटका मिला शव

हिन्दुस्तान टीम,गयाNewswrap
Sun, 14 Nov 2021 06:50 PM
गया के डुमरिया में नक्सलियों ने चार को मारा, फंदे से लटका मिला शव

गया के डुमरिया में नक्सलियों ने चार को मारा, फंदे से लटका मिला शव

डुमरिया के मौनबार में चार ग्रामीणों की नक्सलियों ने की हत्या शवों को शेड में लटकाया

हादसे के 19 घंटे बाद उठाया गया शव

शेरघाटी। निज संवाददाता

काली वर्दी में आए भाकपा माओवादी के हथियारबंद नक्सलियों ने डुमरिया थानाक्षेत्र की काचर पंचायत के मौनबार गांव के बघमरवा टोले में शनिवार को एक ही परिवार की दो महिलाओं सहित चार व्यक्तियों की हत्या कर दी। जिला मुख्यालय से करीब सौ किलोमीटर दूर नक्सलियों ने इस घटना को अंजाम दिया है।

इस खौफनाक हत्याकांड के बाद नक्सलियों ने शवों को उनके घर के बाहर गौशाला में नारियल की रस्सी के सहारे लटका दिया था। यह वही स्थान है, जहां मार्च 2021 में चार नक्सलियों कोबरा कमांडो ने मार गिराया था। मृतकों की पहचान सत्येंद्र सिंह भोक्ता और उनके सगे भाई महेंद्र सिंह भोक्ता तथा दोनों की पत्नियां क्रमश: मनोजवा देवी और सुनीता देवी के रूप में की गई है।

इस हृदय विदारक नरसंहार को नक्सलियों ने शनिवार की शाम करीब सात बजे तब अंजाम दिया। उस समय घर की महिलाएं खाने-पकाने में लगी थीं।

हत्या कांड के बाद भाकपा माओवादी के नक्सलियों द्वारा मौके पर छोड़े गए हस्तलिखित पर्चे में कहा गया है कि चार क्रांतिकारियों की हत्या की साजिश का बदला लिया गया है।

मालूम हो कि इसी वर्ष 16 मार्च को कोबरा कमांडो के साथ हुई कथित मुठभेड़ में चार नक्सली मारे गए थे। चारों नक्सलियों की पहचान अमरेश, सीता, शिवपूजन और उदय के रूप में की गई थी। इस घटना के बाद नक्सलियों ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए कहा था कि यह ठंडे दिमाग से की गई हत्याएं थीं। नक्सलियों का आरोप था कि नक्सलियों को मौत के घाट उतारे जाने में सत्येंद्र सिंह और महेंद्र सिंह के परिवार ने भी साजिश की थी।

नक्सलियों द्वारा किसी महिला की हत्या किए जाने की यह पहली घटना है। आम तौर पर नक्सलियों के बारे में यह धारणाएं थीं कि वह महिलाओं, बच्चों, बीमार और वृद्धों की हत्याएं नहीं करते हैं। अतीत में नक्सलियों ने मुखबिरी का आरोप लगा कर कई लोगों को मौत के घाट उतारा है, उनके घरों को भी तोड़ा-फोड़ा है, मगर महिलाओं की जान नहीं ली थी। ताजा घटना से महिलाओं के प्रति नरमी बरतने की नक्सलियों की नीति गलत साबित हुई है।

हत्याकांड के करीब 19 घंटे के बाद मौके से पुलिस ने शवों को उठाया और उसे पोस्टमार्टम के लिए गया भेज दिया।

घटनास्थल डुमरिया थाने से नौ किलोमीटर दूर जंगल में स्थित है। वहां पहुंचने के लिए पुलिस को पहाड़ी पगडंडियों के सहारे करीब पांच किमी पैदल चलना पड़ा। मौके पर गया के सिटी एसपी राकेश कुमार के साथ क्षेत्रीय पुलिस अधिकारी भी पहुंचे थे। इस हादसे के बाद आस-पास के गांवों में डर और दहशत का माहौल है।

इस भयानक हत्याकांड के शिकार बने सत्येंद्र सिंह भोक्ता की 15 वर्षीय बेटी शोभा कुमारी ने बताया कि शाम करीब सात बजे नक्सलियों का जत्था आया। घर के लोगों ने जब दरवाजा खोला तो तमाम लोग घर में घुस गए। घर के सभी लोगों को एक जगह आंगन में इकट्ठा कर चार व्यक्तियों क्रमश: उसके माता-पिता और चाचा-चाची को अलग किया। बाकी तमाम लोगों को घर से निकाल कर दूसरे घर में बंद कर दिया। कुछ देर बाद रोने चिल्लाने की आवाजें आईं, फिर घर जलने का उजाला दिखा।

डर से कोई घर से नहीं निकला। सुबह जब लोग घर से निकले तो चारों व्यक्तियों की लाशें झाले में लटकी मिलीं। इस हादसे के बाद रूदन-क्रंदन का सिलसिला बना हुआ है।

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