शेरघाटी में सामान्य कचरे के साथ हो रहा मेडिकल कचरे का निबटारा

Jan 29, 2026 07:52 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गया
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शेरघाटी में सामान्य कचरे के साथ हो रहा मेडिकल कचरे का निबटारा कचरे के ढेर में रूई और खून लगी पट्टियों के साथ सिरिंज की भरमार चोरी-छिपे चलने वाले नीम ह

शेरघाटी में सामान्य कचरे के साथ हो रहा मेडिकल कचरे का निबटारा

शेरघाटी में कई स्थानों पर डम्प किए गए कचरे के ढेर में अक्सर दवा की शीशियां, ब्लड बैग, कांच, प्लास्टिक की बोतलें, युरिन बैग, कैथेडर ट्यूब और सेट्स, सिरिंज, फिक्सड निडिल सिरिंज, रूई, खून लगी पट्टियां, ठोस प्लास्टर, एक्सपायर दवाएं आदि जरूर मिल जाते हैं। इससे साफ जाहिर है कि शहर के अस्पतालों से निकले मेडिकल कचरे को भी सामान्य कचरे की तरह निबटारा किया जा रहा है। मान्य और निबंधित अस्पतालों में बेहतर है कचरा निबटारे की व्यवस्था अनुमंडलीय अस्पताल के वरीय चिकित्सक डॉ. राजेश कुमार कहते हैं कि अनुमंडलीय अस्पताल या फिर शहर के दूसरे प्रतिष्ठित और निबंधित निजी अस्पतालों में तो मेडिकल कचरे के निबटारे के लिए एक बायो मेडिकल वेस्ट कम्पनी काम कर रही है।

लेकिन, चोरी-छिपे चलने वाले ग्रामीण चिकित्सकों के दवाखानों में यह व्यवस्था नहीं है। इसी वजह से अस्पतालों से निकलने वाले कचरे को सीधे आम कचरे के साथ इधर-उधर फेंक दिया जा रहा है। मानव स्वास्थ के लिए हानिकारक माने जाने वाले ऐसे कचरों में प्लेसेंटा भी शामिल होता है, जिसे कुत्ते वगैरह खाते हैं। इस्तेमाल की गई सुइयों के साथ ऑपरेशन के नोकदार सामान भी ऐसे कचरे में पड़े मिल जाते हैं। इस तरह की चीजों से कचरे में भोजन ढूंढने वाले जानवरों के पांव कटने या जख्मी होने के साथ कचरा बीन कर रोटी कमाने वाले लोगों के भी घायल, चोटिल होने का खतरा बना रहता है। पर्यावरण की दृष्टि से मानव स्वास्थ को जो नुकसान है वह अलग। कहां से निकल रहा मेडिकल कचरा बताया जाता है कि मेडिकल कचरा निस्तारण करने वाली कम्पनी के कर्मचारी हर दूसरे दिन निबंधित प्राइवेट अस्पतालों से कचरा इकट्ठा कर इसे ले जाते हैं और सुरक्षित ढंग से इसका निबटारा करते हैं। महीने में 36 किलो तक कचरा पैदा करने वाले अस्पतालों को इसके लिए हर महीने 1800 रुपये का भुगतान भी करना पड़ता है, जबकि छोटे, अनाम और नीम हकीमों द्वारा संचालित अस्पतालों में यह व्यवस्था नहीं है। शहर में चल रहे नीम हकीमों के दवाखाने जानकारों की मानें तो शासन और स्वास्थ के अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर में ही दर्जन-भर से ज्यादा नीम हकीमों के दवाखाने चल रहे हैं, जहां सिजेरियन से लेकर दूसरे कई किस्म के ऑपरेशन रोज होते हैं और कचरों को इधर-उधर फेंक दिया जाता है।

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