DA Image
हिंदी न्यूज़   ›   बिहार  ›  गया  ›  विदेशी घास खेतों को बना रहा बंजर, घट रही उर्वरा क्षमता
गया

विदेशी घास खेतों को बना रहा बंजर, घट रही उर्वरा क्षमता

हिन्दुस्तान टीम,गयाPublished By: Newswrap
Thu, 17 Jun 2021 04:10 PM
विदेशी घास खेतों को बना रहा बंजर, घट रही उर्वरा क्षमता

आमस। एक संवाददाता

प्रखंड के किसान पार्थेनियम (वैज्ञानिक नाम) नामक विदेशी घास से खासे परेशान हैं। स्थानीय तौर पर इसे गाजर व अंग्रेजी घास के नाम से भी जाना जाता है। यह उपजाऊ भूमि पर तेजी से फैल रहा है। इससे खेतों की उर्वरा शक्ति तेजी से घटती जा रही है। तेतरिया, रेगनियां, मोरैनियां, मंझौलिया, आमस, नवगढ़, ताराडीह आदि गांवों की सैकड़ों एकड़ भूमि बंजर होती जा रही है। इंदल प्रसाद, गोपाल सिंह, उदय यादव, रूपलाल चौहान आदि किसानों ने कहा कि यह विदेशी घास उनके खेतों में तेजी से फैल रहा है। एक बार उग जाने के बाद खत्म ही नहीं होता। वल्कि आस-पास के खेतों मे भी फैल जाती है।

इससे खेतों में फसल लगाना मुश्किल हो रहा है। बताया जाता है कि देश में 1966 में पड़े भीषण आकाल के दौरान भारत सरकार ने चीन व अमेरिका से गेहूं मंगवाया था। इसमें जैविक हथियार के तौर पर इस घास को भेजा गया था। पौधा संरक्षण अधिकारी चंदन दास ने बताया कि इसे खत्म करने के लिए कृषि विभाग के पास कोई उपाय नहीं है। जन्म के साथ ही इसे उखाड़ कर फेंकने से ही समाप्त हो सकता है।

क्या कहते हैं किसान

उपजाऊ खेतों में यह घास तेजी से फैल रहा है। इससे फसलों के उपज पर प्रभाव पड़ रहा है। गर्मी के दिनों में इसका और तेजी से विकास होता है। संजय मांझी, भूपनगर, आमस

पिछले कुछ सालों में उनके क्षेत्र में यह तेजी से फैला है। जिस वजह खेतों की जुताई करना मुश्किल होता जा रहा है। सुखा पड़ने पर यह और तेजी से फैलता है। द्वारिक यादव, मसुरीबार, आमस

तेलहन, धनहर के अलावा अन्य भूमि पर भी तेजी से उग रहा है। एक बार उग जाने के बाद खत्म नहीं होता। खेतों की नमी और उपजाऊ शक्ति को तेजी से नष्ट कर रहा है। ललन पासवान, करमाईन, आमस

संबंधित खबरें