
टिकारी में तिलकुट की खरीददारी को देर शाम तक रही भीड़
साेंधापन और खास्ता तिलकुट के लिए प्रसिद्ध है टिकारी का तिलकुट मकर संक्रांति को लेकर सुबह से तिलकुट के लिए दुकानों पर रही भीड़ फोटो- टिकारी में तिलकुट
मकर संक्रांति को लेकर टिकारी बाजार में तिलकुट की खरीददारी को खूब भीड़ जुटी। बेल्हड़िया मोड़ से लेकर दुर्गा स्थान चौक तक तिल और गुड़ की भीनी-भीनी खुशबू से सराबोर हो उठा है। ठंड के मौसम में शरीर को ऊर्जा देने वाले तिल-गुड़ से बनी टिकारी की तिलकुट की बात ही अलग है। यहां का तिलकुट अपनी पतली परत, खस्तापन और शुद्ध स्वाद के लिए दूर-दराज तक प्रसिद्ध है। सुबह से ही दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। लोग अपने घर के लिए तो खरीद ही रहे हैं, साथ ही रिश्तेदारों और मित्रों को भेजने के लिए भी पैक करवा रहे हैं।
स्थानीय कारीगरों का कहना है कि इस मौसम में उनकी मेहनत रंग लाती है। कई परिवार पीढ़ियों से इस व्यवसाय से जुड़े हैं। सुबह से देर रात तक कड़ाही के पास खड़े होकर तिलकुट बनाना आसान नहीं, लेकिन त्योहार की रौनक और ग्राहकों की मुस्कान सारी थकान मिटा देती है। सौगात के रूप में सभी राज्यों तक पहुंचता है तिलकुट टिकारी से दूर रहने वालों के लिए बतौर सौगात के रूप में दिल्ली, बंगाल, कनार्टक, हरियाण, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात देश के लगभग सभी राज्यों में भेजा जाता है। देश से बाहर भी तिलकुट को भेजा जाता रहा है। टिकारी में तिलकुट का धंधा टिकारी राज के समय से जुड़ा हुआ है। मकर संक्रांति के लिए तो एडवांस बुकिंग रहती है। कई दर्जन दुकानों में रोजाना सैकड़ों कारीगर मिलकर मांगों को पूरा करते हैं। ओल्ड विकास तिलकुट भंडार के संचालक बबलू गुप्ता ने बताया कि तिलकुट की असली पहचान टिकारी से जुड़ी हुई है। यहां के तिलकुट का खस्तापन सबसे अलग है। तिलकुट का निर्माण शरद ऋतु के कार्तिक महीने से शुरू होता है और माघ महीने तक चलता है।

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