गुरपा को प्रखंड बनाने की मांग फिर तेज, आंदोलन की तैयारी शुरू
गुरपा को प्रखंड बनाने की मांग फिर तेज, आंदोलन की तैयारी शुरू -वर्षों से लंबित मांग को लेकर क्षेत्रीय लोगों में बढ़ी सक्रियता -सीमा क्षेत्र होने के बा

फतेहपुर प्रखंड के ऐतिहासिक और बौद्धकालीन क्षेत्र गुरपा को प्रखंड का दर्जा दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। लंबे समय से लंबित इस मांग को लेकर अब स्थानीय लोगों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। ‘गुरपा प्रखंड बनाओ संघर्ष समिति’ से जुड़े प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके लिए क्षेत्र में व्यापक स्तर पर तैयारी भी शुरू कर दी गई है। संघर्ष समिति के मनोज यादव, सत्येंद्र यादव, पैक्स अध्यक्ष राजदेव यादव, मुखिया सारिका देवी, समाजसेवी रंजीत साव, सुरेंद्र प्रसाद, डब्ल्यू यादव, कक्कू सिंह, कमलेश कारण, राजेश मांझी समेत अन्य लोगों का कहना है कि गुरपा भौगोलिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
यह बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित होने के साथ गया, नवादा, कोडरमा और हजारीबाग जिलों के बीच एक केंद्रीय स्थल के रूप में पहचान रखता है। इसके बावजूद यह क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं और विकास से वंचित है।गुरपा के अधिकांश गांव जंगल, पहाड़ और नदियों से घिरे हैं, जहां सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहीं, ऐतिहासिक गुरुपदगिरि पर्वत पर बौद्ध और हिंदू सभ्यता के साक्ष्य मौजूद हैं, जहां देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। बावजूद इसके, पर्यटन सुविधाओं की कमी साफ दिखाई देती है। लोगों का मानना है कि यदि गुरपा को प्रखंड का दर्जा मिल जाता है, तो क्षेत्र में प्रशासनिक पहुंच बढ़ेगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी। इससे न केवल स्थानीय निवासियों को लाभ होगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। इसी उम्मीद के साथ अब क्षेत्रवासी अपनी मांग को लेकर निर्णायक आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं।
कृपया अपने अनुभव को रेट करें
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


