Jain Muni takes 'Samadhi' - जैन मुनि ने ली सल्लेखना समाधि DA Image

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जैन मुनि ने ली सल्लेखना समाधि

शहर के जैन भवन में गुरुवार को जैन मुनि दुर्लभ सागर जी महाराज (85 वर्ष) ने सल्लेखना समाधि ले ली। दिगम्बर जैन आचार्य कालयोगी परम पूज्य 108 शीतल सागर जी महाराज के शिष्य ने मुनि श्री ने 95 दिनों के बाद गुरुवार की दोपहर नश्वर शरीर का त्याग कर दिया। दिवगंत मुनि श्री पिछले दिनों 23 उपवास और एक जल ग्रहण कर रहे थे।

सात दिनों से जल पानी व संपूर्ण आहार का त्याग कर रखा था। सल्लेखना समाधि के बाद उनका अंतिम संस्कार शहर के केंदुई घाट पर हुआ। मुखाग्नि जैन समाज के अजीत सेठी, संजीव सेठी व विजय सेठी ने दी। अंतिम संस्कार के मौके पर जैन समाज की भारी भीड़ थी। नम आखों से लोगों ने जैन मुनि की अंतिम विदाई दी। शुक्रवार को जैन भवन में दिवंगत जैन मुनि दुर्लभ सागर जी महाराज के प्रति विन्यांजलि सभा आयोजित की जाएगी।

अंतिम संस्कार पर उमड़े जैन समाज के लोग

जैन मुनि की सल्लेखना समाधि के बाद दिगम्बर जैन भवन से विमान यात्रा निकली। पार्थिव शरीर के साथ निकले विमान यात्रा में जैन समाज की महिलाएं, बच्चे सहित भारी संख्या में पुरुष शामिल हुए। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए विमान यात्रा केंदुई घाट पर यहां। यहां जैन समाज के विधि-विधान के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया।

जैन मुनि के दर्शन को देश भर से आ रहे श्रद्धालु

जैन भवन में सल्लेखना समाधि के लिए उपवास पर रहे जैन मुनि दुर्लभ सागर जी महाराज के दर्शन को देश भर से जैन श्रद्धालु आए। जैन समाज के मीडिया प्रभारी मुन्ना सरकार जैन ने बताया कि परम पूज्य जैन आचार्य कालयोगी परम पूज्य 108 शीतल सागर जी के निर्यापकाचार्यत्व व निर्देशन में सल्लेखना समाधि हुई। उन्होंने बताया सल्लेखना समाधि जैन साधना का उत्कृष्ट उदाहरण है। दिवगंत हुए जैन मुनि के गृहस्थ जीवन के पुत्र व पुत्रियां भी यहां लंबे समय से सेवा में अपना योगदान दे रहे थे।

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