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सीतारूपी भक्ति अपना लें तो श्रीराम को खोजने की जरूरत नहीं : आचार्य

हिन्दुस्तान टीम,गयाPublished By: Newswrap
Wed, 13 Oct 2021 07:10 PM
सीतारूपी भक्ति अपना लें तो श्रीराम को खोजने की जरूरत नहीं : आचार्य

गया। निज प्रतिनिधि

राम भगवान हैं और जानकी भक्ति हैं । महाराज दशरथ के पास राम हैं और जनक के पास जानकी जी हैं। जहाँ दशरथ जी को राम की प्राप्ति के लिए यज्ञ करवाना पड़ा वहीं जनक जी के पास राम स्वयं चल कर जाते हैं। बोधगया के गाफाखुद के शिवालय में चल रहे श्रीराम कथा के सातवें दिन बुधवार को डॉ. मनोहर मिश्र जी महाराज ने इस कथा का अर्थ बताया कि जो भी मनुष्य अपने जीवन में सीता रूपी भक्ति को अपना लेता है उसे फिर भगवान को खोजने की जरूरत नहीं पड़ती है। श्रीराम रूपी भगवान स्वयं चलकर उसके जीवन में आ जाते हैं ।

महाराज श्री ने धनुष भंग की भी बहुत ही अद्भुत कथा सुनायी। कहा कि धनुष अहंकार व अज्ञान का प्रतीक है। ।जब तक अहंकार एवं अज्ञान का धनुष टूटता नहीं है तब तक भगवान के पीठ पर सवार रहता है। जैसे ही अहंकार व अज्ञान का धनुष टूटता है तो तुरंत वही धनुष भगवान के चरणों में पड़ जाता है। महाराज श्री ने इस कथा के माध्यम से यह संदेश दिया कि हमारे जीवन में भी ना जाने कितने कुरीतियां अज्ञान के कारण पल-बढ़ रहे हैं। लेकिन, हर मानव का यही धर्म है कि अपनी बुराई व अज्ञान रूपी अहंकार को छोड व तोड़ कर भक्ति और भगवान के चरणों पर अपने आप को समर्पित कर दें, इसी में मनुष्य जन्म की सार्थकता है। कथा के दौरान संगीतमयी सुरीली भजनों व विवाह गीत पर श्रद्धालु झूमते रहे। इस मौके पर कन्हैया जी, दीपक कुमार, शैलेन्द्र कुमार पुष्प राजकुमार प्रेमी, महेन्द्र सिंह, पवन सिंह, पंकज सिंह व मनोज सिंह सहित भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

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