होलिका दहन की लपटें की दिशाएं देती हैं शुभ व अशुभ का संकेत
होलिका दहन की लपटें की दिशाएं देती हैं शुभ व अशुभ का संकेत होलिका दहन की लपटें की दिशाएं देती हैं शुभ व अशुभ का संके

होलिका दहन सोमवार की आधी रात बाद होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका दहन में निकलने वाली आग की लपटें का भी विशेष महत्व है। लपटें किस दिशा में जाती है इससे शुभ व अशुभ का अनुमान लगाता जाता है। आचार्य नवीनचंद्र मिश्र वैदिक कहते हैं कि धार्मिक ग्रथों के अनुसार होलिका दहन की आग की लपेटों किस दिशा में जाती है इसका अलग-अलग महत्व है। अगर होलिका की लपटें दक्षिण की ओर गयी तो शुभ नहीं और पुरवैया हुई तो सुख-शांति। पश्चिम की ओर जाती है आंधी-पानी और उत्तर दिशा में जाना भी अच्छा होता है। इशान कोण की ओर गयी तो प्रजा सुखी रहेगी और अग्नि कोन पर गयी तो अगलगी की घटनाओं की संभावना होती है।
आज होलिका दहन, मंगलवार को मनेगी होली आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस बार पूर्णिमा व भद्रा के कारण होलिका दहन के दूसरे दिन होली नहीं है। ऋषिकेश और महावीर पंचाग के अनुसार इस तरह की स्थिति बन रही । पंचागों के अनुसार 2 मार्च की शाम 5.18 बजे से पूर्णिमा शुरू हो रहा है। साथ ही साथ भद्रा लग जाएगा। 4.56 बजे भोर तक भ्रदा भी रहेगा। इसलिए आधी रात 12.50 के बाद से सूर्योदय से पहले तक होलिका दहन करना उत्तम रहेगा। फागुन पूर्णिमा 2 मार्च की शाम 5.18 बजे से लेकर 3 मार्च की 4.33 बजे तक व्याप्त रहेगा। इस कारण 3 मार्च होली मनाना शुभ नहीं है। दूसरे दिन यानी चार मार्च को मेन होली है। पांच मार्च को मटकाफोड़ होली मनायी जाएगी। होलिका दहन के समय जपा हुआ मंत्र सिद्धप्रद होता है आचार्य नवीनचंद्र मिश्र वैदिक ने बताया कि होलिका दहन के समय मंत्र सिद्ध के लिए खास होता है। मार्केण्डेय पुराण के अनुसार इन तीनों रात्रि में यंत्र निर्माण, तंत्र साधन और मंत्रों का जाप करना सिद्धिदायक है। होलिका दहन की रात को हुताशनी रात्रि भी कहा जाता है। आधी रात या तीसरे पहर तक यंत्र सिद्धि, मंत्र सिद्धि और तंत्र सिद्धि होती है। इस दिन को लोग साल भर इंतजार करते हैं।
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