सरकारी नौकरी सबको संभव नहीं, लेकिन कृषि व एमएसएमई में रोजगार की अपार संभावनाएं : जीतनराम मांझी

Mar 01, 2026 07:38 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गया
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सरकारी नौकरी सबको संभव नहीं, लेकिन कृषि व एमएसएमई में रोजगार की अपार संभावनाएं : जीतनराम मांझी • बजट में शिक्षा के लिए लगभग 60 हजार करोड़ रुपए का प्

सरकारी नौकरी सबको संभव नहीं, लेकिन कृषि व एमएसएमई में रोजगार की अपार संभावनाएं : जीतनराम मांझी

प्रत्येक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देना किसी भी सरकार के लिए संभव नहीं है। लेकिन, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र में रोजगार की असीम संभावनाएं मौजूद हैं। केंद्र सरकार इन दोनों क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रही है और युवाओं को स्वरोजगार के लिए कौशल विकास से जोड़ा जा रहा है। यह बातें रविवार को केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतनराम मांझी ने मगध विश्वविद्यालय के 65वें स्थापना दिवस समारोह के मौके पर कहीं। उन्होंने कहा कि देश की जीडीपी में 35 प्रतिशत हिस्सेदारी एमएसएमई क्षेत्र की है और कुल निर्यात का 47 फीसदी योगदान भी इसी सेक्टर से आता है।

वर्ष 2015 के बाद सात करोड़ से अधिक इकाइयों के माध्यम से इस क्षेत्र ने लगभग 33 करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया है, जो इसकी व्यापक संभावनाओं का प्रमाण है। कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश की 65 प्रतिशत आबादी खेती पर निर्भर है और जीडीपी में सबसे अधिक योगदान भी इसी क्षेत्र का है। उन्होंने खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में उन्होंने कहा कि देश में वन क्षेत्र का दायरा अभी लगभग 16 प्रतिशत है, जबकि लक्ष्य 33 प्रतिशत होना चाहिए। जंगलों का विस्तार पर्यावरण संतुलन को भी बनाएगा और जनस्वास्थ्य को भी बेहतर करेगा। समारोह में विश्वविद्यालय के विकास संबंधी प्रस्तावों पर चर्चा करते हुए कुलपति द्वारा दो हजार क्षमता वाले ऑडिटोरियम के निर्माण की मांग रखी गयी, जिस पर जीतनराम मांझी ने पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में बोधगया मठ के मठाधीश शतानंद गिरी और स्व. सत्येंद्र नारायण सिंह की प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव भी रखा। पूर्ववर्ती छात्र होने के नाते उन्होंने विश्वविद्यालय से अपने भावनात्मक जुड़ाव का भी उल्लेख किया। शिक्षा में निवेश ही समाज के भविष्य को सुदृढ़ बनाता है बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को विश्वविद्यालय की प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षा में निवेश ही समाज के भविष्य को सुदृढ़ बनाता है। उन्होंने जानकारी दी कि बिहार सरकार ने हाल के बजट में शिक्षा के लिए लगभग 60 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो अब तक का सर्वाधिक है। बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के स्वामी विवेकानंद गिरी ने मगध विश्वविद्यालय के स्थापना में बोधगया मठ योगदान की व्याख्या की। 155 से अधिक परीक्षाएं आयोजित कर सत्र को किया गया नियमित कुलपति प्रो. एसपी शाही ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि छह पेटेंट पंजीकृत कराए गए हैं और परीक्षाओं को नियमित कर शैक्षणिक वातावरण को सुदृढ़ किया गया है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण द्वारा उपलब्ध कराए गए 20 करोड़ रुपये से एआई सेंटर की स्थापना की जा रही है। जहां इस सत्र से डिप्लोमा से लेकर पीजी स्तर तक की पढ़ाई प्रारंभ होगी। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में 155 से अधिक परीक्षाएं और 300 से ज्यादा संगोष्ठियां एवं कार्यशालाएं आयोजित की गयी। जिससे विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सक्रियता बढ़ी है। अधिष्ठाता प्रो प्रमोद कुमार चौधरी ने शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीप शिखा पांडेय और डॉ. परम प्रकाश राय ने किया। जबकि कुलसचिव प्रो बिनोद कुमार मंगलम ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह के अवसर पर स्मारिका और एक पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया। बोधगया मगध विश्वविद्यालय की 65वॉ स्थापना दिवस समारोह का दीप प्रज्वलित का उद्घाटन करते केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ प्रेम कुमार कुलपति प्रो. एसपी शाही व अन्य।

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