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षष्ठी पूजन के बाद दुर्गाबाड़ी में देवी दर्शन शुरू

हिन्दुस्तान टीम,गयाPublished By: Newswrap
Mon, 11 Oct 2021 07:31 PM
षष्ठी पूजन के बाद दुर्गाबाड़ी में देवी दर्शन शुरू

शहर के दुर्गाबाड़ी और पंजाबी कॉलोनी में बांग्लाशैली में मां की पूजन के साथ सोमवार की शाम से पट खुले। बंगाली समाज के अलावा आसपास के लोगों ने माता के दर्शन किए। मंगलवार सप्तमी से माता की बांग्लाशैली में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू होगी। कोविड-19 के गाइडलाइन के अनुसार इस बार प्रतिमा छोटी बिठायी गई है। पंडाल भी छोटे हैं। इन दोनों के अलावा शहर के पूजा-पंडालों में सप्तमी पूजन यानी मंगलवार से पट खुलेंगे। मां की प्रतिमा स्थापित करने को लेकर सोमवार को पूजा पंडालों में तैयारी अंतिम चरण में रही। रंग-बिरंगी बल्बों से सजावट कर दी गई है। देवी के गीत गूंजने लगे हैं।

पेड़ की पूजा कर कलश की स्थापना की

दुर्गाबाड़ी और बंगाली कॉलोनी में सोमवार षष्ठी की सुबह पेड़ की पूजा के साथ कलश स्थापित की गई। गया दुर्गावाटी समिति के बैनर तले आयोजित पूजन में मुख्य रूप से बंगाली की समाज महिलाएं शामिल हुईं। पूजन में हैप्पी चक्रवर्ती, मौसमी राय, गीता मित्रा, विन्नी दत्ता व महुआ चटर्जी सहित अन्य महिलाएं शामिल हुईं।

समिति के अध्यक्ष प्रदीप कुमार सेन (लाल्टु दा) व सचिव विश्वदीप चौधरी ने बताया कि सुबह दुर्गाबाड़ी में बेल, नीम, पीपल, और गुलड़ के वृक्ष की पूजा हुई। शाम में देवी का आह्वान किया गया। अधिवास हुआ। इसके बाद माता का दर्शन शुरू हो गया। दोनों स्थानों पर बांग्ला तरीके से माता की पूजा के लिए बंगाल से पुजारी आए हैं। दुर्गापूजा समिति, बंगाली कॉलोनी के समिति के अध्यक्ष गौरीशंकर भट्टाचार्य और सचिव गणेश कुमार मुखर्जी ने बताया कि सुबह वृक्ष पूजा व कलश स्थापना हुई। शाम में देवी का आमंत्रण और अधिवास हुआ। इसके बाद मां का पट भी खुल गए। सातवीं से विधिवत रूप से पूजा शुरू हो जाएगी। सप्तमी से लेकर दशमी की सुबह तक चलेगी। सबसे मुख्य पूजा अष्टमी पुष्पांजलि और नवमी को संधिपूजा होगी। विजयी दशमी के दिन प्रतिमा का विसर्जन कर दिया जाएगा। इसी दिन सिंदूर की होली होगी।

पूजा पंडालों में देवी की प्रतिमा स्थापित, आज खुलेंगे पट

शहर के पूजा पंडालों में मां देव की प्रतिमा पष्ठी सोमवार से मां देवी की प्रतिमा स्थापित होने लगीं। शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित कुम्हारों के यहां से प्रतिमाओं का जाना का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। सबसे पुराने पांच लाइसेंसी मूर्तियां पंडाल में स्थापित कर दिए गए। मंगलवार को पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के दर्शन-पूजन को मां के पट खुल जाएंगे। शाम श्रद्धालु मां के दर्शन को पूजा-पंडाल में आएंगे।

इस बार बड़े पंडाल और भव्य प्रतिमाओं का नहीं होगा दर्शन

कोविड-19 को लेकर जिला प्रशासन के आदेशनुसार शहर में बड़े पंडाल और भव्य मूर्तियों का निर्माण नहीं हुआ है। शहर के मुख्य आर्कषण केदारनाथ मार्केट, हाते गोदाम, स्टेशन रोड में छोटा पंडाल बना है। पहले की मुकाबले मूर्ति की छोटी है। लेकिन, लाइट से सजावट की गई है।

मुरारपुर, गोल बागीचा, पनदरिवां, आजाद पार्क सहित कई इलाकों में प्रतिमा स्थापित नहीं

कोरोना सहित कुछ अन्य कारणों को लेकर शहर के आकर्षण मुरारपुर, गोल बागीचा, मीरसफायत रोड, पनदरिवां, आजाद पार्कव स्टेशन परिसर सहित अन्य कई इलाकों में इस बार मां देवी की प्रतिमाएं स्थापित नहीं की गई है। इन स्थानों पर भव्य पंडाल के नहीं होने के साथ ही आकर्षण प्रतिमाओं का स्थापित नहीं किए जाने के कारण रौनक फीकी रहेगी। कोरोना काल से पहले के मुकाबले दुर्गापूजा के मेले का रंग फीका रहेगा।

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