जियोलॉजी के छात्रों ने किया भूवैज्ञानिक फील्ड अध्ययन
दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के जियोलॉजी विभाग ने एमएससी जियोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भूवैज्ञानिक फील्ड अध्ययन आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शैल-प्रकारों की पहचान और मापन तकनीकों से परिचित कराना था। विद्यार्थियों ने विभिन्न भूगर्भीय संरचनाओं का अध्ययन किया और औद्योगिक खनन स्थलों का दौरा किया।
दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के जियोलॉजी विभाग की ओर से लैब टू लैंड एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत एमएससी जियोलॉजी (तृतीय सेमेस्टर) के विद्यार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश की सोनभद्र एवं मध्य प्रदेश की सिंगरौली जिला के विभिन्न स्थलों पर दो सप्ताह का भूवैज्ञानिक फील्ड अध्ययन आयोजित किया गया। इस अध्ययन का उद्देश्य विद्यार्थियों को विभिन्न शैल-प्रकारों एवं भूवैज्ञानिक संरचनाओं की पहचान एवं वर्गीकरण का प्रशिक्षण देना तथा फील्ड उपकरणों एवं आवश्यक मापन तकनीकों के उपयोग से परिचित कराना था। फील्ड सत्रों के दौरान विद्यार्थियों ने महाकोशल समूह की परसोई एवं अघोरी संरचनाओं, विंध्यन सुपरग्रुप के सेमरी एवं कैमर समूह तथा लोअर गोंडवाना सुपरग्रुप की संरचनाओं का अध्ययन किया।
विद्यार्थियों ने भूवैज्ञानिक मैपिंग, खनिज एवं शैल पहचान, खनिज अन्वेषण पद्धतियाँ, खनन परिचालन तथा औद्योगिक खनिज प्रसंस्करण का व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया जिससे उनकी अनुप्रयुक्त क्षमताओं में वृद्धि हुई और यह विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप साबित हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यार्थियों ने जीएसआई के झिर्गाडांडी (चोपन–डाला क्षेत्र) स्थित कॉपर अन्वेषण स्थल का भ्रमण कर परसोई संरचना तथा लोअर विंध्यन सेमरी समूह के एक्सपोजर का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों ने मारकुंडी घाट उत्तराधिकार, मारकुंडी फॉल्ट, शालखन पार्क संग्रहालय में उपस्थित स्ट्रोमैटोलाइट प्रदर्शनों तथा अघोरी किला क्षेत्र के अघोरी फॉल्ट का भी अध्ययन किया। टीम ने जीएसआई के भहारी, सोनभद्र स्थित आयरन अन्वेषण स्थल का भी निरीक्षण किया। औद्योगिक भ्रमण के तहत विद्यार्थियों ने डाला अल्ट्राटेक चूना पत्थर खदान एवं सीमेंट प्लांट, हिंडाल्को एल्युमिनियम प्लांट (रेणुकूट), खड़िया कोयला खदान और हिंडाल्को पावर प्लांट (रेणुसागर) का दौरा किया। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रफुल्ल कुमार सिंह के नेतृत्व में कार्यक्रम का समन्वय डॉ. विकल कुमार सिंह एवं डॉ. लोंगजम कबीता चानू ने किया।

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