
तीन साल में भी रोपवे अधूरा, पर्यटकों की उम्मीदों पर फिरा पानी
-ब्रह्मयोनि, प्रेतशिला और ढ़ुंगेश्वरी में रोपवे सुविधा नहीं -पर्यटन विकास योजनाओं पर अमल में देरी
गयाजी-बोधगया को विश्व पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की बड़ी योजनाएं वर्षों से बनाई जा रही हैं। लेकिन, जमीनी हकीकत अब भी निराशाजनक है। प्रदेश सरकार और पर्यटन विभाग द्वारा शुरू किए गए ब्रह्मयोनि, प्रेतशिला और ढ़ुंगेश्वरी पहाड़ी पर तीन प्रमुख रोपवे प्रोजेक्ट तीन वर्षों में भी पूरा नहीं हो सके हैं। नतीजतन, हजारों पर्यटकों को इस साल भी खड़ी पहाड़ियों की कठिन पैदल चढ़ाई झेलनी पड़ेगी। सुविधाएं अधूरी, पर्यटक परेशान हर साल लाखों की संख्या में देसी-विदेशी पर्यटक गयाजी और बोधगया पहुंचते हैं। बुद्धभूमि की अंतरराष्ट्रीय पहचान, मोक्षस्थली का धार्मिक महत्व और पहाड़ियों की आस्था सब मिलकर गयाजी को पर्यटन का केंद्र बनाते हैं।
लेकिन, बदहाल बुनियादी सुविधाएं अधूरा विकास और रोपवे जैसी आवश्यक सुविधा के ठप रहने से पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर प्रेतशिला पर्वत और ब्रह्मयोनि पहाड़ी पर पिंडदान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भीड़ उमड़ती है। पहाड़ी की चढ़ाई कठिन और थकाऊ होने के कारण सरकार ने यहां रोपवे सुविधा उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। लेकिन, कार्य कराने वाले एजेंसियों की धीमी कार्यशैली से परियोजना तीन वर्षों में भी पूरी नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन को बढ़ावा देने के क्षेत्र में प्रशासन बड़ी-बड़ी घोषणाएं करता है। लेकिन, वास्तविक सुविधा तक पहुंचाने में वर्षों की देरी होती है। लंबे पैदल रास्ते, असुविधा और भीड़ के बीच पर्यटकों को ऊपर तक चढ़ना कठिन होता है। प्रेतशिला पर पहुंचने के लिए चढ़नी पड़ती हैं 676 सीढियां गया जी स्थित 54 पिंडवेदियों में प्रेतशिला प्रमुख पिंडवेदी है। अकाल मृत्यु को प्राप्त पूर्वजों के आत्मा की शांति के लिए पिंडदानी यहां कर्मकांड करते हैं। प्रेतशिला पर्वत पर पहुंचने के लिए 676 सीढियां चढ़ने पड़ते हैं। अगर रोपवे की सुविधा होती है तो वैसे लोग जो पैदल पहाड़ पर चढ़ नहीं सकते हैं, वे भी अब इन पहाड़ की वादियों को देख सकेंगे। साथ दर्शन और पूजन कर सकेंगे। वर्तमान में श्रद्धालु सीढ़ी के रास्ते या पहाड़ के रास्ते किसी तरह से जाते हैं। वहीं, रोपवे का निर्माण होने से ट्रॉली में बैठकर आराम से लोग जा सकेंगे। करोड़ों की है परियोजना प्रेतशिला पर 10.50 करोड़ रुपये की लागत से, ढ़ुंगेश्वरी पर 16 करोड़ रुपये और ब्रह्मयोनि पर नौ करोड़ रुपये की लागत से रोपवे निर्माण कार्य कराया जा रहा है। तीनों स्थलों पर कार्य अधूरा है और यात्रियों को इसका लाभ अब तक नहीं मिल पाया है।

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