डोभी औद्योगिक कॉरिडोर क्षेत्र के सर्वेक्षण में मिले प्रजातियों के पक्षी
डोभी औद्योगिक कॉरिडोर क्षेत्र के सर्वेक्षण में मिले प्रजातियों के पक्षी • कॉरिडोर निर्माण से पहले क्षेत्र में जैव विविधता का किया गया आकलन फोटो न्यूज

गया जिले के डोभी औद्योगिक कॉरिडोर क्षेत्र में आधारभूत संरचना तैयार होने से पूर्व पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके तहत डोभी के कॉरिडोर क्षेत्र व आसपास पक्षियों का पांच दिवसीय विस्तृत सर्वेक्षण गुरुवार को संपन्न हो गया। सर्वेक्षण में 61 प्रजातियों के पक्षी मिले हैं। यह सर्वेक्षण बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बियाडा) के गया कार्यालय की पहल पर भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के पटना स्थित गंगा सम भूमि प्रादेशिक केंद्र की चार सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने किया। यह सर्वेक्षण इसलिए जरूरी था। क्योंकि डोभी से सटे बाराचट्टी में गौतम बुद्ध वन्य जीव अभ्यारण्य की मौजूदगी से गया क्षेत्र समृद्ध और विविधतापूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के साथ जैव विविधता से परिपूर्ण है।
इस सर्वेक्षण के दौरान क्षेत्र में 61 प्रजातियों के पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गयी। इनमें गायन पक्षियों की कई प्रजातियां, कबूतर वर्ग के डव सहित चार प्रकार के पक्षी, पपीहा सहित अन्य स्थानीय और प्रवासी पक्षी शामिल हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह क्षेत्र विभिन्न पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, जहां घोंसला बनाने और प्रजनन की प्रक्रिया नियमित रूप से संचालित होती है। सर्वेक्षण टीम का नेतृत्व साइंटिस्ट-ई सह क्षेत्रीय प्रभारी डॉ. अनिल कुमार ने किया। उनके साथ वरीय प्राणी वैज्ञानिक रजनीश रंजन, राहुल कुमार व फील्ड सहायक भरत दास शामिल रहे। साइंटिस्ट-ई सह क्षेत्रीय प्रभारी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि किसी भी बड़े निर्माण कार्य से पहले वहां के पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता का वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होता है। सर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर ऐसी कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे कॉरिडोर निर्माण के दौरान पक्षियों के प्राकृतिक आवास, नेस्टिंग साइट और प्रवास चक्र पर प्रतिकूल असर न पड़े। गया क्षेत्र की समृद्ध पारिस्थितिकी और विविध प्राकृतिक संसाधनों ने यहां व्यापक जैव विविधता को संरक्षित रखा है। मेगा इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से स्थानीय जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभावों का पांच दिनों तक वैज्ञानिक आकलन किया गया। ऐसे में डोभी औद्योगिक कॉरिडोर के विकास के साथ संरक्षण के संतुलन को सुनिश्चित करने की दिशा में यह सर्वेक्षण एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल है। बियाडा के उप महाप्रबंधक रविरंजन प्रसाद ने बताया कि औद्योगिककरण की स्थापना के मद्देनजर मानक पैमाने पर सर्वेक्षण कराया गया है। सर्वे में इन प्रजातियों के मिले पक्षी औद्योगिक कॉरिडोर क्षेत्र में सर्वेक्षण के दौरान लाल गलफुल्ली टिटिहरी, पीली गलफुल्ली टिटिहरी, यूरेशियन कॉलर्ड फाख्ता (गले में काली पट्टी वाली फाख्ता), चितकबरी फाख्ता, हंसती फाख्ता, पपीहा (ब्रेनफीवर पक्षी), महाकौवा / भरद्वाज, जंगली उल्लू, सफेद गले वाला किंगफिशर (सफेद गला किलकिला), हरा मधुमक्खीभक्षी, नीलकंठ, थाहुदहुद, भूरा सिर बार्बेट, ताम्रकार बार्बेट (कठफोड़वा जैसा टकटकाने वाला), कत्थई पीठ लटोर, सामान्य वुडश्राइक, अबाबील, लाल पुछल्ला बुलबुल, सामान्य चिफचैफ, दर्जी चिड़िया, साधारण प्रिनिया, जंगल बैबलर (सात भाई), सामान्य बैबलर, भारतीय रॉबिन, दयाल, टैगा फ्लाइकैचर, काली रेडस्टार्ट, नीलकंठी (नीले गले वाली चिड़िया), मैना, गंगामैना, एशियाई पाइड स्टारलिंग (सफेद-काली मैना), ब्राह्मणी मैना, जामुनी सुगरबर्ड, भूरी कंधे वाली पेट्रोनिया, भारतीय सिल्वरबिल (चांदी चोंच फिंच) सहित अन्य प्रजाति के पक्षी मिले हैं।
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