Hindi NewsBihar NewsGaya NewsEmpowering Women Leadership CUSB Research Scholars Conference Highlights
महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बदलाव पर जोर

महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बदलाव पर जोर

संक्षेप: दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में ''महिला-नेतृत्व विकास एवं सशक्तिकरण'' पर तीसरा शोधार्थी सम्मेलन आयोजित किया गया। प्रो. वीनू पंत ने महिला-नेतृत्व वाले विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों की समान भागीदारी से ही सतत विकास संभव है। 29 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

Tue, 18 Nov 2025 03:53 PMNewswrap हिन्दुस्तान, गया
share Share
Follow Us on

दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में ''महिला-नेतृत्व विकास एवं सशक्तिकरण'' विषय पर सीयूएसबी का तीसरा रिसर्च स्कॉलर्स (शोधार्थी सम्मेलन) आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम सीयूएसबी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के कार्यालय (ओआईए) और अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ (आरएंडडी) द्वारा विकासशील देशों के लिए अनुसंधान एवं सूचना प्रणाली (आरआईएस), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया। सिक्किम विश्वविद्यालय की प्रोफेसर वीनू पंत (इतिहास विभाग) ने यूरोपीय इतिहास और भारतीय दार्शनिक परंपराओं के दृष्टिकोणों को एकीकृत करके ''एक बेहतर दुनिया के लिए महिला-नेतृत्व विकास'' के विकास पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रो. वीनू पंत ने महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बदलाव पर जोर दिया।

LiveHindustan को अपना पसंदीदा Google न्यूज़ सोर्स बनाएं – यहां क्लिक करें।

उन्होंने कहा कि हमें ऐसे समाज का निर्माण करना चाहिए जहां महिलाओं को कल्याण की प्राप्तकर्ता के रूप में देखा जाता है। उन्होंने महिलाओं के आर्थिक विकास, सामुदायिक कल्याण और सामाजिक प्रगति को गति देने वाली प्रमुख आयामों की ओर बदलाव पर जोर दिया। समावेशी वातावरण बनाना है: वीसी सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि पुरुष और महिलाएं अपनी क्षमताओं और मानवीय मूल्यों में मूलतः समान हैं, और दोनों लिंगों की सक्रिय भागीदारी के बिना सतत राष्ट्रीय विकास प्राप्त नहीं किया जा सकता। महिलाओं को सशक्त बनाने का अर्थ पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा करना नहीं है, बल्कि एक समावेशी वातावरण बनाना है जहां पुरुष और महिलाएं समान भागीदार के रूप में मिलकर काम करें। इस साझा जिम्मेदारी और आपसी सम्मान से ही एक सच्चे विकसित राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। कार्यक्रम के संयोजक प्रो. राकेश कुमार ने बताया कि तकनीकी सत्र में 29 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए और मौखिक प्रस्तुति के लिए 12 सर्वश्रेष्ठ शोध पत्रों का चयन किया गया। सीयूएसबी के अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ के निदेशक प्रो. दुर्ग विजय सिंह ने नवाचार को बढ़ावा देने और सामाजिक विकास में योगदान देने में अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया।