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गया जी में एम-वाई समीकरण चित, तेजस्वी का जादू बेरंग

गया जी में एम-वाई समीकरण चित, तेजस्वी का जादू बेरंग

संक्षेप: 10 में आठ सीटों पर एनडीए की सुनामी, राजद सिमट कर रह गया सिर्फ दो

Fri, 14 Nov 2025 06:21 PMNewswrap हिन्दुस्तान, गया
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जिले के चुनावी नतीजों ने महागठबंधन के लिए बड़ा झटका साबित किया है। कई चुनावों से जातीय आधारित मुस्लिम-यादव समीकरण पर भरोसा जताने वाले तेजस्वी यादव का जादू इस बार पूरी तरह फीका पड़ गया। जिले के 10 सीटों में से आठ पर एनडीए ने कब्जा जमा लिया, जबकि महागठबंधन सिर्फ बोधगया और टिकारी दो सीटों पर सिमट कर रह गया। जातीय गणित, स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवारों की रणनीति इन तीनों मोर्चों पर महागठबंधन पिछड़ता दिखा। जनता ने इस बार जातीय कार्ड नहीं, बल्कि काम और उम्मीदवार की विश्वसनीयता को वोट दिया। महागठबंधन के लिए गया का परिणाम सीधा संदेश है।

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जनता हवा नहीं, हिसाब देख रही है। 2020 से 2025: राजद की जमीन खिसकी, एनडीए बना मजबूत खिलाड़ी 2020 में स्थिति बिल्कुल अलग थी। गया की 10 सीटों में पांच-पांच सीटें दोनों गठबंधनों के बीच बंटी थीं। लेकिन, राजनीतिक जमीन धीरे-धीरे बदलने लगी। 2024 के उपचुनाव में बेलागंज सीट पर बड़ा उलटफेर हुआ। राजद से यह सीट छीनकर जदयू की मनोरमा देवी ने जीत हासिल की और जिले में एनडीए का आंकड़ा छह तक पहुंच गया। उस वक्त अतरी, बोधगया, गुरुआ और शेरघाटी चार सीटों पर राजद की पकड़ रही। 2025 के इस विधानसभा चुनाव में समीकरण बुरी तरह उलट गया। राजद अपनी तीन अहम सीटें अतरी, गुरुआ और शेरघाटी बचाने में नाकाम रही। इन जगहों पर एनडीए के उम्मीदवारों ने स्पष्ट बढ़त से जीत दर्ज की, जिससे गठबंधन की पकड़ कमजोर होती दिखी। बोधगया और टिकारी: राजद की बची हुई उम्मीद जिले में महागठबंधन का वजूद सिर्फ दो सीटों पर बचा बोधगया और टिकारी। बोधगया में कुमार सर्वजीत ने एक बार फिर राजद का किला बचाया और मजबूत जनाधार के सहारे जीत हासिल की। टिकारी सीट पर राजद को बड़ी सफलता मिली। हम पार्टी के अनिल सिंह को मात देते हुए राजद उम्मीदवार अजय दांगी ने यह सीट छीन ली। टिकारी में पिछली बार हम पार्टी से अनिल सिंह ने जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार राजद ने समीकरण को अपने पक्ष में करते हुए जीत दर्ज की। गया में बदलती राजनीतिक हवा इस चुनाव ने साफ कर दिया कि गया में महागठबंधन का जनाधार तेजी से खिसक रहा है। जहां एनडीए लगातार मजबूत होती गई, वहीं राजद अपने परंपरागत वोट बैंक को संजोने में नाकाम रहा। जातीय समीकरणों के बावजूद जनता ने इस बार विकास, स्थानीय कामकाज और उम्मीदवारों की छवि को तरजीह दी। 10 में आठ सीटों पर जीत दर्ज कर एनडीए ने गया में अपना दबदबा मजबूत किया है। महागठबंधन अब केवल दो सीटों के भरोसे खड़ा है।