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काम में लापरवाही: डुमरिया के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी का वेतन बंद

काम में लापरवाही: डुमरिया के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी का वेतन बंद

संक्षेप:

डुमरिया के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी की लापरवाही के कारण डीएम ने उनका वेतन रोक दिया है। एक शिकायत के अनुसार, कार्यक्रम पदाधिकारी ने जांच ठीक से नहीं की थी और रिपोर्ट में त्रुटियां थीं। डीएम ने 10 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया है। मामले की जांच तेजी से जारी है।

Dec 10, 2025 05:41 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गया
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काम में लापरवाही: डुमरिया के मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी का वेतन बंद जनता दरबार में हुई शिकायत के बाद नहीं भेजी गई सही जांच रिपोर्ट डीएम के जनता दरबार में आने वाली शिकायतों की हो रही जांच - निर्देश गया जी, प्रधान संवाददाता डीएम के जनता दरबार में आयी शिकायत की जांच ठीक से नहीं करना डुमरिया के कार्यक्रम पदाधिकारी को महंगा पड़ा। डीएम ने अगले आदेश तक उनका वेतन रोक दिया है। दरअसल, डुमरिया के एक आवेदन ने मनरेगा में काम कराने के बाद पैसे नहीं देने से संबंधित शिकायत की थी। डीएम ने इस मामले की जांच कराने के लिए डीडीसी का दिया था।

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डीडीसी ने इसकी जांच मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी डुमरिया से करायी। इस मामले में कार्यक्रम पदाधिकारी ने जो रिपोर्ट भेजी वह सही नहीं है। ना ही इस मामले में शिकायतकर्ता से बात की गई। अब वेतन बंद करते हुए 10 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने का निर्देश हुआ है। इसी प्रकार बेलागंज के आवेदक ने पशु शेड के आवेदन किया था। लेकिन उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि शेड निर्माण के लिए पहली किश्त किसी और के बैंक खाते में भेजी जा चुकी है। डीएम ने इस मामले में डीडीसी को तेजी से जांच कराने को कहा। साथ ही चिन्हित कर कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। अधिकारियों की जांच कहां तक पहुंची, रोस्टर की समीक्षा कर रहे डीएम जनता दरबार में आने वाली शिकायत की जांच कहां तक पहुंची इसकी निगरानी डीएम शशांक शुभंकर कर रहे हैं। उन्होंने तिथिवार रोस्टर बनाया है जिसमें अलग-अलग अधिकारियों के पास जांच के लिए भेजी गई शिकायतों के निष्पादन की समीक्षा हो रही है। यदि आवेदन लंबित है तो उसका कोई ठोक कारण है या नहीं। इसी कड़ी में डीडीसी के यहां जांच को भेजी गई शिकायतों में कुछ की समीक्षा की गई। पहले से ही निर्देश था कि इस समीक्षा में आवेदक को अनिवार्य रूप से बुला जाए। निर्देश दिया गया कि जिन मामलों का निष्पादन हो जाए उनके परिवादी से जांच रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कराएं।