Gaya News: जिले में धान रोपनी की रफ्तार सुस्त, लक्ष्य का केवल 22.30 प्रतिशत पूरा
Gaya News: -बारिश की कमी से पिछड़ी खेती, उत्पादन पर मंडराने लगा संकट -पिछले वर्ष की तुलना

Gaya News: जिले में खरीफ मौसम 2026-27 के दौरान धान रोपनी की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी है। कृषि विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार जिले में इस वर्ष एक लाख 80 हजार 970.80 हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके मुकाबले अब तक केवल 40 हजार 353.83 हेक्टेयर क्षेत्र में ही रोपनी पूरी हो सकी है जो कुल लक्ष्य का मात्र 22.30 प्रतिशत है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक जिले में करीब 55 प्रतिशत क्षेत्र में धान की रोपनी पूरी हो चुकी थी। इस बार आधी से भी कम रोपनी होने से किसानों के साथ कृषि विभाग की चिंता बढ़ गई है। रोपनी में मानपुर सबसे आगे, टिकारी सबसे पीछे
रोपनी की स्थिति
मानपुर में 47.7 प्रतिशत रोपनी के साथ जिले में पहले स्थान पर है। इसके बाद टनकुप्पा 38.9 प्रतिशत और बोधगया 37 प्रतिशत रोपनी के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। इमामगंज में 35.7, डोभी में 33.1 और गुरारू में 31.1 प्रतिशत रोपनी हुई है। दूसरी ओर टिकारी में मात्र चार प्रतिशत रोपनी के साथ सबसे पीछे है। परैया में 6.6, आमस में 8.1 और फतेहपुर में 8.6 प्रतिशत क्षेत्र में ही रोपनी हो सकी है जिससे इन इलाकों में खेती की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
बारिश की कमी
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस वर्ष समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में आवश्यक जलभराव नहीं हो सका। जिन क्षेत्रों में नहर, तालाब या बोरिंग जैसी सिंचाई सुविधाएं सीमित हैं वहां किसानों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई किसान अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं ताकि रोपनी का कार्य तेजी से पूरा किया जा सके। मौसम की अनिश्चितता के कारण खेती का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ है।
कृषि विभाग के निर्देश
जिला कृषि अधिकारी संजीव कुमार ने जिले के सभी कृषि समन्वयकों और प्रखंड स्तरीय अधिकारियों को पंचायत स्तर पर किसानों से लगातार संपर्क बनाए रखने तथा उन्हें उपलब्ध सिंचाई संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने की सलाह देने का निर्देश दिया है। विभाग का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा होती है तो रोपनी की गति तेज हो सकती है। साथ ही किसानों को समय पर रोपनी पूरी करने और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
देर से रोपनी का प्रभाव
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में रोपनी में अपेक्षित तेजी नहीं आई तो इसका सीधा प्रभाव धान के उत्पादन पर पड़ेगा। देर से रोपी गई फसल में पैदावार कम होने के साथ कीट एवं रोगों का प्रकोप भी बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में जिले के किसान बेहतर मानसून की उम्मीद लगाए हुए हैं। जबकि कृषि विभाग प्रतिदिन रोपनी की प्रगति की समीक्षा कर स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
(गया जी से राजेश कुमार मिक्की की रिपोर्ट)


