पितृपक्ष : पिंडदानियों से पटा रहा विष्णुपद, सोलह देवी पर किया पिंडदान

पितृपक्ष : पिंडदानियों से पटा रहा विष्णुपद, सोलह देवी पर किया पिंडदान

संक्षेप:

पितृपक्ष : पिंडदानियों से पटा रहा विष्णुपद, सोलह देवी पर किया पिंडदान पितृपक्ष : पिंडदानियों से पटा रहा विष्णुपद, सोलह देवी पर किया पिंडदान

Sep 15, 2025 03:26 am ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गया
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पितृपक्ष के आठवें दिन रविवार को त्रिपाक्षिक गयाश्राद्ध कर रहे पिंडदानियों की भीड़ लगातार तीसरे दिन विष्णुपद मंदिर में रही। मंदिर परिसर से लेकर आसपास केइलाकों में बैठकर पिंडदान किया। लगातार तीसरे दिन तीर्थयात्रियों ने मंदिर परिसर के पूर्वी कोने में स्थित सोलह वेदी पर पिंड अर्पित किए। रविवार को सप्तमी और अष्टमी तिथि का एक साथ विधान किया। सोलह वेदी के साथ ही विष्णुपद मंदिर के गर्भगृह पिंडदानियों के पटा रहा। गर्भगृह में जाने के लिए लंबी कतार लगी रही। इस वक्त त्रिपाक्षिक से अधिक एक व तीन दिन का गयाश्राद्ध कर रहे पिंडदानियों की भीड़ से मंदिर से लेकर फल्गु के घाट पटा रह रहा है।

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रविवार की दोपहर बाद से लगातार हुई हल्की बारिश ने पिंडदानियों को परेशान किया। घाट पर बने पंडाल पिंडदानियों ने भरेरहे। हालांकि पिछले सात दिनों के मुकाबले रविवार को मेला क्षेत्र में पिंडदानियों की भीड़ कम रही। जितिया का असर दिखा। 11 वेदियों पर पिंड चढ़ाकर पितरों के मोक्ष की कामना की त्रिपाक्षिक गया जी श्राद्ध करे पिंडदानियों ने रविवार को आश्विन कृष्ण पक्ष सप्तमी और अष्टमी तिथि का पिंडदान किया। 11 वेदियों का विधान किया। सप्तमी को लेकर चंद्रपद, गणेशपद, सभ्यागिनपद, अवस्यागिनपद, दधीचि और कण्वपद और अष्टमी तिथि को लेकर मातंगपद, क्रौचपद, इंद्रपद, अगस्त्यपद, काश्यपद और गर्जकर्ण वेदी पर पिंडदान किया। गजकर्ण वेदी पर दूध से तर्पण कर पितरों के मोक्ष की कामना की। विष्णुपद में तीन रहने के बाद सोमवार को त्रिपाक्षिक करने वाले पिंडदानी सीताकुंड जाकर पिंडदान करेंगे। साथ ही विष्णुपद मंदिर, देवघाट, संगत घाट, रबर डैम से लेकर प्रेतिशला तक एक व तीन दिनी पिंडदान करने वालों की भीड़ रहेगी। विष्णुचरण के दर्शन व पिंड अर्पित को लगी कतार विष्णुपद मंदिर में तीन दिनों से पिंडदानियों की भीड़ बढ़ी हुई। विष्णुचरण के दर्शन और पिंड चढ़ाने को लेकर भीड़ रही। हालांकि रविवार को भीड़ कम रही। रविवार की सुबह 9 बजे पिंडदानियों की कतार विष्णुपद मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर संवाद सदन समिति के कार्यालय तक ही रही। जबकि पिछले दिनों कामख्या मंदिर के पार तक कतार रही थी। मंदिर के मुख्य दरवाजे के साथ ही गर्भगृह में जाने के लिए धूप घड़ी के पास बने जिग-जैग में पिंडदानियों की कतार रही। दोपहर बाद बारिश होने के बाद मेले की रौनक फीकी पड़ गयी। खासकर दूसरे प्रदेश से आए फुटपाथी दुकानदारों को परेशानी हुई। दोपहर बाद से शाम तक होती रही बारिश से मेला क्षेत्र में भीड़ नहीं रही।