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बौद्ध धर्म-: आज से त्रैमासिक वर्षावास काल में गए बौद्ध भिक्षु

बौद्ध धर्म-: आज से त्रैमासिक वर्षावास काल में गए बौद्ध भिक्षु

बौद्ध धर्म-: आज से त्रैमासिक वर्षावास काल में गए बौद्ध भिक्षु

बौद्ध भिक्षुओं का त्रैमासिक वर्षावास काल मंगलवार से शुरू हो गया। महाबोधि मंदिर के बौद्ध भिक्षुओं के साथ थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका, कम्बोडिया देशों के बौद्ध श्रद्धालुओं ने महाबोधि मंदिर में विशेष अनुष्ठान के साथ वर्षावास काल की शुरूआत की। वर्षावास काल व्यतीत करने वाले भिक्षु एक ही स्थान पर रहकर ध्यान-साधना और पूजा-अर्चना करेंगे। वे विचरण नहीं करते हैं। इसके पीछे तर्क यह है कि वर्षा ऋतु में कई तरह के छोटे-छोटे जीव जन्म लेते हैं। जो विचरण करने से पैर से दब सकते हैं। इससे जीव की हत्या होती है। इससे बचने के लिए तीन माह वर्षावास व्यतीत किया जाता है। कई देशों के बौद्ध मठों में बौद्ध भिक्षु यहां वर्षावास व्यतीत करने आते हैं।

महाबोधि मंदिर के केयरटेकर भंते दीनानंद व भंते मनोज ने बताया कि बौद्धधर्म में वर्षावास का बड़ा ही महत्व है। इसका प्रारम्भ बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद भगवान बुद्ध ने किया था। बुद्ध ने उपदेश देते हुए कहा था कि वर्षाकाल में गांवों में भिक्षाटन के लिए नहीं जाएं। क्योंकि भिक्षुओं के समूह में चलने से कृषि को काफी नुकसान हो सकता है तथा कीड़े-मकोड़ों का भी डर रहता है। इस दौरान भिक्षु बौद्धधर्म की बारीकियों का अध्ययन करते हैं। वे आषाढ़ पूर्णिमा से आश्विन पूर्णिमा तक किसी एक ही विहार में रहने का संकल्प लेते हैं। वर्षावास काल 13 अक्टूबर को समाप्त होगा। उसके बाद महाबोधि मंदिर में कठिन चीवरदान के परंपरा की शुरूआत होगी। जो एक माह तक विभन्नि बौद्ध मठों में आयोजित किया जाएगा। पवित्र वर्षावास अनुष्ठान में हिस्सा लेने के लिए विभिन्न देशों के बौद्ध भिक्षुओं का बड़ी संख्या में दल बोधगया पहुंचा है। वे यहां एक ही स्थान पर रहकर तीन माह ध्यान साधना करेंगे। इसको लेकर यहां के बौद्ध विहारों में विशेष तैयारी की गई है।

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  • Web Title:Buddhist monk from today s quarterly rainforest