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बुद्ध का जीवन निडरता, प्रज्ञा और करुणा का अद्भुत प्रतीक : राज्यपाल

बुद्ध का जीवन निडरता, प्रज्ञा और करुणा का अद्भुत प्रतीक : राज्यपाल

संक्षेप:

-22 देशों के भिक्षुओं और श्रद्धालुओं की उपस्थिति वैश्विक बौद्ध संस्कृति एकता का प्रतीक

Dec 12, 2025 06:31 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, गया
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भगवान बुद्ध का जीवन निडरता, प्रज्ञा और करुणा का अद्भुत प्रतीक है। बुद्ध ने सत्य की खोज स्वयं के लिए नहीं, बल्कि मानवता के दुखों को दूर करने के लिए की। उनका संदेश ‘आत्मदीपो भव’ हमें सिखाता है कि मनुष्य को बाहरी आश्रय के बजाय अपने अनुभव, अपने सत्य और अपने आचरण को ही आधार बनाना चाहिए। उक्त बातें बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां ने शुक्रवार को महाबोधि मंदिर में कहीं। राज्यपाल ने 20वां इंटरनेशनल त्रिपिटक चैटिंग समारोह के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि बोधगया की यह पवित्र भूमि सदियों से करुणा, शांति और मानवता का संदेश देती आयी है। उन्होंने कहा कि यहां 22 बौद्ध देशों से आए भिक्षुओं और श्रद्धालुओं की उपस्थिति वैश्विक बौद्ध संस्कृति की अद्भुत एकता का प्रतीक है। यह अंतरराष्ट्रीय त्रिपिटक चैंटिंग समारोह वर्ष 2006 में मात्र 250 प्रतिभागियों से प्रारंभ हुआ था, जो आज बढ़कर लगभग 20 हजार श्रद्धालुओं की वैश्विक सभा बन चुका है। राज्यपाल ने इसे आयोजन समिति, दानदाताओं, स्वयंसेवकों और बौद्ध समुदाय की समर्पित भावना का परिणाम बताया। राज्यपाल ने कहा कि बोधगया वही पवित्र भूमि है, जहां लगभग 2500 वर्ष पूर्व सिद्धार्थ गौतम ने ज्ञान प्राप्त कर विश्व को शांति, अहिंसा और करुणा का मार्ग दिखाया। सम्राट अशोक से लेकर आधुनिक काल तक यह स्थल पूरी मानवता के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का अनंत स्रोत रहा है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि बुद्ध के उपदेश आज भी पूरे विश्व को इसलिए आकर्षित करता है। क्योंकि उनका लक्ष्य मानवता के दुखों का निवारण था। विवेकानंद ने सदैव इस बात पर बल दिया कि बुद्ध का धर्म करुणा, शांति और मानव कल्याण पर आधारित है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी उतनी ही गहरी है। राज्यपाल खान ने कहा कि बुद्ध ने कर्म, संयम और सद्भाव का मार्ग दिखाया। साथ ही बताया कि संसार अस्थायी है और दुख से मुक्ति सम्यक ज्ञान व सम्यक कर्म में निहित है। उन्होंने दार्शनिक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि बुद्ध का सबसे बड़ा संदेश मानव सेवा और करुणा ही है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अंतरराष्ट्रीय समारोह शांति, सद्भाव और करुणा के संदेश को और सुदृढ़ करेगा।

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भगवान बुद्ध को टेका मत्था

बोधगया पहुंचने पर राज्यपाल सीधे महाबोधि मंदिर गए और गर्भगृह में भगवान बुद्ध को मत्था टेककर बिहार समेत देश-दुनिया की खुशहाली की कामना की। मंदिर के गर्भगृह में महाबोधि मंदिर के वरीय पुजारी भिक्षु डॉ. मनोज, भिक्षु डॉ. दीनानंद सहित अन्य भिक्षुओं ने पूजा कराई। इसके पहले बीटीएमसी की ओर डीएम शशांक शुभंकर, सचिव डॉ. महाश्वेता महारथी, सदस्य डॉ. अरविंद कुमार सिंह सहित अन्य ने राज्यपाल को महाबोधि मंदिर का प्रतीक चिन्ह, बोधिपत्ता व कॉफी टेबल बुक भेंटकर स्वागत किया।

यहां की सकारात्मक ऊर्जा सभी को प्रेरित करती है : सिस्टर उषा

ब्रह्मकुमारी संस्था की वरिष्ठ राजयोगिनी सिस्टर ऊषा ने कहा कि बोधगया में आयोजित इस समारोह में शामिल होना मेरे लिए अत्यंत सम्मान की बात है। बोधिवृक्ष की पावन छाया में दुनिया के 22 देशों से आए भिक्षु-भिक्षुणियों और श्रद्धालुओं का एक साथ जुटना करुणा, प्रेम और विश्व शांति का अद्भुत संदेश देता है। भगवान बुद्ध ने इसी भूमि से शांति, सद्भाव और मानवीय मूल्यों का प्रकाश पूरी दुनिया में फैलाया। आज भी यह पवित्र धरा सकारात्मक ऊर्जा से सभी को प्रेरित करती है। दस दिवसीय चैटिंग समारोह की दिव्य तरंगें भारत और विश्व में शांति, एकता और सद्भाव को और मजबूत करेंगी। मैं आयोजकों की आभारी हूं कि उन्होंने मुझे इस आध्यात्मिक आयोजन का हिस्सा बनने का अवसर दिया।

ओडिशा आध्यात्मिकता की वास्तविक अनुभूति करें: अतिरिक्त सचिव

ओडिशा पर्यटन विभाग के अतिरिक्त सचिव सरोज कुमार स्वैन ने कहा कि ओडिशा सदियों से करुणा, शांति और बौद्ध संस्कृति का केंद्र रहा है। कलिंग युद्ध के बाद सम्राट अशोक का हृदय परिवर्तन और धौली से प्रारंभ हुई वैश्विक शांति संदेश की परंपरा आज भी दुनिया को मार्ग दिखा रही है। उन्होंने बताया कि रत्नागिरि, उदयगिरि और ललितगिरि जैसे प्राचीन बौद्ध स्थलों में महायान, वज्रयान और प्रारंभिक बौद्ध विचारों का अद्भुत संगम मिलता है। उन्होंने 11 से 16 जनवरी तक ओड़िशा के गोल्डन ट्रायंगल में आयोजित पद्मसम्भव बौद्ध महोत्सव में देश-विदेश के भिक्षुओं व श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि ओड़िशा की समुद्री परंपरा ने बौद्ध संस्कृति को एशियाई देशों तक पहुंचाया है। ओड़िशा आएं और शांति, विरासत व आध्यात्मिकता की वास्तविक अनुभूति करें।

जेठियन से वेणुवन पैदल यात्रा आज करेंगे भिक्षु

जेठियन से वेणुवन तक पंच पहाड़ियों की तलहटी शनिवार को बुद्धम शरणम गच्छामि और धम्मं शरणं गच्छामि की मंगल ध्वनि से गूंजेगी। बुद्ध के पदचिह्नों पर चलते हुए करीब पांच हजार बौद्ध भिक्षु मानवता, करुणा और विश्वशांति का संदेश देंगे। महाबोधि मंदिर में चल रहे 20वें इंटरनेशनल त्रिपिटक चैटिंग समारोह में शामिल 22 देशों के भिक्षु अहले सुबह छह बजे विश्वशांति प्रार्थना के बाद जेठियन के लिए रवाना होंगे। वहां से अंतरराष्ट्रीय धम्म पदयात्रा शुरू होकर राजगीर स्थित ऐतिहासिक वेणुवन तक पहुंचेगी। यह यात्रा बुद्ध के उपदेशों के पुनर्जागरण और वैश्विक सद्भाव का प्रतीक मानी जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में बौद्ध श्रद्धालु भी शामिल रहेंगे।