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तापमान अधिक बढ़ने से होता चमकी बुखार: डॉ. सारथी

गर्मी के महीनों खासकर अप्रैल से जून के बीच तापमान अधिक बढ़ने से चमकी बुखार के लक्षण ज्यादा दिखाई देते हैं। बढ़ते तापमान के साथ-साथ रुक-रुक कर होने वाली बारिश और उमस की वजह से दूषित पानी से चमकी बुखार तथा जापानी बुखार जैसी खतरनाक बीमारी पैदा होती है। ये शोध दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय के पर्यावरण विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. प्रधान पार्थ सारथी ने का है। सीयूएसबी की प्रयोगशाला में डॉ. सारथी ने एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) और जेपनीज इन्सेफेलाइटिस (जेई) पर शोध किया है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों के वातावरण और बदलते तापमान के अध्ययन से प्राप्त परिणामों के बाद यह बात कही है। डॉ. सारथी ने कहा कि एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) एक नैदानिक स्थिति है जो जापानी एन्सेफलाइटिस (जेई) बीमारी का सबसे आम कारण है। चमकी बुखार और जापानी बुखार के पर शोध करते हुए पाया कि तापमान, वर्षा और आर्द्रता आदि संक्रामक वेक्टर जनित और जल जनित बीमारियों के माध्यम से तरह-तरह की घातक बीमारियां पैदा हो रही हैं।वर्ष 2009 से 2014 तक एईएस के मामलों की संख्या अप्रैल-मई में दिखाई देने लगी और जून में अपने चरम पर पहुंच गई। मानसून के महीनों में वर्षा शुरू होने पर इन बीमारियों की संख्या में गिरावट आई। वर्षा ऋतू समाप्ति पर होता है तो सितम्बर और अक्टूबर के महीनों में जापानी बुखार के लक्षण बड़ी संख्या में दिखते हैं। शोद्यार्थी प्रवीण कुमार के साथ शोध से अध्ययन करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि 2009-2014 की अवधि के लिए बिहार में एईएस और जेई मामलों के साथ वर्षा, आर्द्रता और तापमान का सीधा सकारात्मक संबंध है। यह भी तथ्य पता चला कि एईएस और जेई के मामले गया, नवादा, जहानाबाद, पटना, वैशाली, मुजफ्फरपुर, पूर्व और पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और सिवान जिलों में अधिक होते हैं क्यूंकि यहां बिहार के अन्य जिलों को तुलना में ज्यादा गर्मी पड़ती है।

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  • Web Title: AES cases increase with temperature