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आओ राजनीति करें: घर से बाहर तक नारी सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा

'हिन्दुस्तान' कार्यालय गया में बुधवार को आयोजित संवाद में शामिल महिलाएं।

अब नारी की बारी। यह पुरुषों की जिम्मेवारी है। हमें अलग-अलग नहीं साथ-साथ चलना है। आगे बढ़ना है। बुधवार को कॉटन मिल स्थित हिन्दुस्तान के कार्यालय में आयोजित संवाद में महिलाओं ने सुरक्षा को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। कहा, सुरक्षा मिले तो नारी किसी पर भी भारी पड़ेगीं। प्रोफेसर, गृहणी, व्यवसायी, कर्मचारी, छात्राएं सबों ने माना कानून तो कई हैं। लेकिन, उनका बेहतर तरीके से पालन नहीं होता। 

पुलिस-प्रशासन सुनने को तैयार नहीं। कोई ऐसा प्लेटफॉर्म बने जहां महिलाएं ऑनलाइन शिकायतें दर्ज करा सकें और उनका सही तरीके से निदान हो। संवाद में स्वच्छता पर महिलाओें ने मुखर होकर बात रखी। कहा, आप बिहार में कहीं से कहीं का सफर करें। बस से या लोकल ट्रेन से कहीं शौचालय की व्यवस्था नहीं है। बाथरूम रोक कर रखना मजबूरी है। सैनिटरी नैपकिन पर जीएसटी क्यों सब्सिडी क्यों नहीं? ऐसे सवाल भी उठे। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ तो सही है लेकिन अब होना चाहिए इन लड़कों को समझाओ। 

ऐसे स्लोगन भी छात्राओं ने कहे। हममे बदलाव होने की जानकारी तो शिक्षण प्रणाली में है। लेकिन, लड़कों को भी उनकी उत्सुकता का निदान मिलना चाहिए। महिलाओं को आर्थिक रूप से सबल बनाने, आरक्षण देने, न्यायपालिका में संख्या बढ़ाने, प्रकृति को बचाने में महिलाओं का साथ लेने जैसे मुद्दों पर नारियां मुखर हुईं। जीबीएम कॉलेज की प्रोफेसर रश्मि प्रियदर्शिनी कहती हैं कि लड़का और लड़की में फर्क न हो ऐसा बदलाव होना चाहिए। महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होगीं तो देश की तरक्की तेज गति से होगी। छात्रा अंकिता कहतीं हैं कि लड़कों के घरवालों को अपनी सोच बदलनी होगी। 

चले महिला स्पेशल बस
कामकारी महिलाओं और छात्राओं के लिए अलग से बसें चलायी जाएं। इससे कामकाजी महिलओं और रोजाना पढ़ाई के लिए दूर से आने वाली छात्राओ को आसानी होगी। बेहतर परिवहन सुविधा मिलने से कार्यालय में महिलाओं की उपस्थित बढ़ेगी। छात्राएं भी कॉलेज, कोचिंग आसानी से पहुंच पाएंगी। महिलाओं से जुड़े अपराध में कमी आएगी।

राजनीति में मिले मौका
राजनीति में महिलाओं की भूमिका बहुत कम है। घर की दहलीज पार करना ही गलत माना जाता है। इस सोच को बदलना होगा। राजनीति में महिलाओं को मौका मिले इसके लिए देश की पार्टियों को विशेष ध्यान रखना चाहिए। जिन्हें मौका मिले वे खुद काम करें। पति के नाम पर सबकुछ नहीं हो।   

 शिकायत तो दर्ज होती लेकिन त्वरित कार्रवाई नहीं होती। डर को अंदर से निकालने की सख्त जरूरत है। 
स्मृति कुमारी ,  गृहिणी 

 पढ़ाई में महिलाओं को आरक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए। आगे बढ़ने के लिए शिक्षा सबसे जरूरी है। 
सोनिया सिंह,  बुटीक संचालिका

लड़कों को भी समझाना होगा। कानून बना है तो उसका पालन कराने के लिए भी  काम होना चाहिए। 
निरमा कुमारी ,  छात्रा

भ्रूण हत्या पर पूरी तरह रोक लगे। नर्सिंग होम पर छापेमारी होनी चाहिए। पकड़े जाने पर कड़ी कार्रवाई हो। 
माधुरी गुप्ता, गृहिणी 

दहेज को लेकर लड़कों को भी ना बोलना होगा। दहेज प्रताड़ना को लेकर अभी और काम करने की जरूरत है। 
सुलोचना कुमारी,  छात्रा

अश्लील चीजों के वायरल होने पर रोक लगनी चाहिए। गंदे ऐप पर बैन जरूरी है। 
आकांक्षा पटेल, छात्रा 

शादी की उम्र 18 व 21 से बढ़ाकर 21 और 25 करने की जरूरत है। 
अंकिता  कुमारी, छात्रा 

महिलाओं को आर्थिक रूप से संपन्न बनाने की दिशा में सरकारी पहल जरूरी है। 
डा. रश्मि प्रियदर्शनी,  प्रोफेसर 

स्कील डेवलपमेंट का कोर्स होना चाहिए ताकि नौकरी नहीं मिलने तो भी स्वावलंबी बनें। 
नगमा शादाद, प्रोफेसर

ऐसा कानून बने कि कोई रंगदारी नहीं मांगे। अत्याचार पर सख्ती से रोक लगे। 
प्रतिमा देवी, गृहिणी 

महिलाओं की सुरक्षा के साथ स्वच्छता भी जरूरी है। सरकार को नैपकीन पर सब्सिडी देनी चाहिए। 
डा. प्रियदर्शनी,  प्रोफेसर 

सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई की स्थिति ठीक नहीं है। बेहतर शिक्षा की दिशा में ज्यादा गंभीर होना होगा। 
सुधा बोस ,  गृहिणी 

आगे बढ़ने के लिए नारी को बेहतर ट्रेनिंग देने की व्यवस्था की जानी चाहिए। बनाए गए नियमों का सही से पालन हो। 
रीना पाटीदार ,  छात्रा

जो हिंसा करे, उसे तुरंत सजा मिलनी चाहिए। महिला अपराध को रोकने की दिशा में और काम की जरूरत है। 
रेणु रानी रौनियार,   गृहिणी 

महिलाएं पढ़ी-लिखीं होंगी तब उनकी समस्याएं भी कम होंगी। यह अहम बात है। 
चंचला देवी ,  गृहिणी 

सुरक्षा के साथ-साथ युवतियों को बढ़िया पढ़ाई की सख्त जरूरत है। 
रंजू कुमारी, गृहिणी 

लड़कियां उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें ऐसा माहौल शहर से लेकर गांव तक में बनाने की जरूरत है। 
पिंकी कुमारी ,  गृहिणी 

लोगों को समस्याएं दूर करन ेके लिए गली-गली में सरका की ओर से नुक्कड़ नाटक होना चाहिए। 
श्वेता राय, छात्रा

राजनीति में भी महिलाओं की अच्छी भागीदारी होनी चाहिए।  सत्ता  में संख्या अच्छा होगी तो उनके अनुसार काम होगा। 
अनुपमा कुमारी ,  गृहिणी 

दहेज को लेकर होने  वाले अत्याचार का कड़ा विरोध होना जरूरी है। इस पर सरकार को ध्यान देना होगा।
सुधा ,  छात्रा 

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  • Web Title:aao rajneeti karein Womens safety is biggest issue