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आओ राजनीति करें: घरेलू हिंसा से बचाव की हो पक्की व्यवस्था

‘हिन्दुस्तान’ की ओर से आयोजित चाय चौपाल कार्यक्रम में विचार विमर्श करते स्थानीय लोग।

आपके अपने अखबार हिन्दुस्तान के चाय चौपाल कार्यक्रम में  जब महिलाओं की स्थिति और उनके अधिकारों पर चर्चा शुरू हुई तो शिक्षा और नौकरी से लेकर घरेलू हिंसा, सुरक्षा, दहेज और कार्यस्थल पर पुरूष सहयोगियों के व्यवहार-बर्ताव आदि पर भी बातें हुईं। चौपाल में कुछ लोगों ने कहा आमतौर पर महिलाओं को महिलाएं ही सताती हैं। घरेलु हिंसा या दहेज उत्पीड़न में आम तौर पर महिलाएं ही शोषण-उत्पीड़न की भी जिम्मेवार होती हैं। 

प्रखंड कार्यालय परिसर में आयोजित इस चौपाल में महिलाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, नौकरी पेशा लोगों और किसान-मजदूरों के साथ कुछ व्यापारी वर्ग के लोगों ने भी महिला इश्यू पर अपनी राय रखी। इस चौपाल में शामिल लोगों में महिलाओं की संख्या अच्छी खासी थी। 

शेरघाटी के ब्लाक प्रमुख भोला चौधरी ने कहा कि घर के बाहर पढ़ने या काम करने के लिए निकलने वाली महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी जरूरी है। इसके लिए प्रखंड स्तर पर महिलाओं के लिए थाना खोला जाना चाहिए या फिर थानों में महिला पुलिस अफसर अनिवार्य रूप से बहाल किया जाना चाहिए।  इस दौरान कई वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा सबसे अहम है। आज स्कूलों में छात्रवृति, पोशाक और साइकिल दिए जाने से लड़कियों का नामांकन तो बढ़ा है, मगर शिक्षा के नाम पर कुछ नहीं है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बगैर उन्हें जागरूक या सशक्त किया जाना मुश्किल है। 

रजीगंज गांव से आइ राजनीतिक कार्यकर्ता मुन्नी देवी का कहना था कि महिलाओं को घरेलू हिंसा से बचाव के लिए सख्त कानून बनाया जाना चाहिए, ताकि घर के भीतर महिलाओं को मुसीबतों से बचाया जा सके। पंचायत प्रतिनिधि केदार यादव का कहना था कि लड़कियों और महिलाओं को पढ़ाई और स्वरोजगार के लिए बगैर ब्याज का कर्ज उपलब्ध कराया जाना चाहिए। समोदबीघा गांव के वृद्ध बिजेश्वर सिंह का कहना था कि महिलाओं के प्रति सम्मान का पाठ बच्चों को स्कूल में पढ़ाया जाना चाहिए। 

घर के बाहर पढ़ने या काम करने के लिए निकलने वाली महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी दिया जाना जरूरी है। प्रखंड स्तर पर महिलाओं के लिए थाना खोला जाना चाहिए। थाने में महिला पुलिस अफसर बहाल किया जाना चाहिए। 
भोला चौधरी, प्रमुख, शेरघाटी  

महिलाओं को घरेलु हिंसा से बचाव के लिए सख्त कानून बनाया जाना चाहिए, ताकि घर के भीतर महिलाओं को मुसीबतों से बचाया जा सके। लड़कियों को सड़क पर हो रहे छिंटाकशी से भी बचाया जा सके। 
-मुन्नी देवी, राजनीतिक कार्यकत्री, रजीगंज 

महिलाओं को महिला हितों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। आमतौर पर महिलाओं को महिलाएं ही सताती हैं। घरेलु हिंसा या दहेज उत्पीड़न में आम तौर महिलाएं ही शोषण-उत्पीड़न की भी जिम्मेवार होती हैं।
-रानी सिंहा, महिला संगठनकर्ता, चिलिम

लड़कियों और महिलाओं की घर से बाहर सुरक्षा सबसे अहम है। सुरक्षा के अभाव में तमाम तरह की बंदिशें हैं, यदि माता-पिता और समाज को महिला सुरक्षा का भरोसा हो जाए तो बाहर निकलने की आजादी भी मिलेगी। 
-विवेक कुमार, छात्र, पलकिया

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  • Web Title:aao rajneeti karein Safeguarded from Domestic Violence