बोधगया में बुद्ध और उनके शिष्यों के अस्थि अवशेष के साथ निकली शोभायात्रा
- जयश्री महाबोधि विहार का 19वां स्थापना दिवस समारोह का हुआ समापन -शहर में

बोधगया स्थित महाबोधि सोसायटी ऑफ इंडिया परिसर में जयश्री महाबोधि विहार का 19वां स्थापना दिवस समारोह मंगलवार को संपन्न हो गया। पांच दिनों तक समारोह को लेकर शहर में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा। अंतिम दिन भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्य शारिपुत्र और महामोग्लान के अस्थि अवशेषों की विशेष पूजा-अर्चना की गयी। इसके उपरांत भव्य शोभायात्रा निकाली गयी। जिसमें देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शोभायात्रा का शुभारंभ मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ. सफीना एएन ने किया। पारंपरिक परिधानों से सजी बग्घी शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण रही। पूरे बोधगया क्षेत्र में ‘बुद्धम् शरणम् गच्छामि’ के गगनभेदी उद्घोष गूंजते रहे।
शोभायात्रा में धर्म, आस्था और अध्यात्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। इसमें वियतनाम, श्रीलंका, कंबोडिया, थाईलैंड, बांग्लादेश, लाओस सहित कई देशों के बौद्ध भिक्षु व श्रद्धालु शामिल हुए। बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी पंचशील ध्वज लेकर कतारबद्ध चलते नजर आए। स्कूली छात्र-छात्राएं भी भगवान बुद्ध के उपदेश लिखी तख्तियां लेकर शोभायात्रा में शामिल हुई। शोभायात्रा के अग्रभाग में भगवान बुद्ध एवं उनके दोनों शिष्यों की प्रतिमाएं एक सुसज्जित वाहन पर विराजमान दिखा। जिन्हें फूल-मालाओं और पंचशील झंडों से सजाया गया था। श्रीलंकाई कलाकारों वाद्य यंत्रों की दी प्रस्तुति शोभायात्रा कालचक्र मैदान से निकलकर बीटीएमसी गोलंबर, एम्बेसी मोड़, मस्तीपुर होते हुए 80 फीट बुद्ध प्रतिमा तक पहुंची और वहां से पुनः महाबोधि सोसायटी परिसर लौटी। पवित्र अस्थि अवशेष को तीन अलग-अलग रथों पर रखा गया था। श्रीलंकाई कलाकारों द्वारा वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों के साथ शोभायात्रा का नेतृत्व किया गया। अंत में जयश्री महाबोधि विहार में अस्थि कलश को विधिवत सुरक्षित स्थापित किया गया। बोधगया में भगवान बुद्ध एवं उनके दो शिष्यों के अस्थि कलश की प्रदर्शनी वर्ष 2007 से लगातार आयोजित की जा रही है, जो विश्व शांति और धर्म समन्वय का संदेश देती है।

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