
उफान पर गंगा नदी, प्रयागराज से भागलपुर तक कई जिलों पर बाढ़ का खतरा; जानें पटना का हाल
प्रयागराज से लेकर भागलपुर तक गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। टना के गांधी घाट तथा हथीदह में गंगा नदी का जलस्तर डेंजर लेवल को पार कर गया है। दो दिनों के अंदर मुंगेर में भी गंगा नदी डेंजर लेवल को पार कर सकती है।
बिहार में गंगा नदी उफान पर है। प्रयागराज से लेकर भागलपुर तक गंगा नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। जिस प्रकार गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की जा रही है, उससे तो ऐसा लग रहा है कि दो दिनों के अंदर मुंगेर में भी गंगा नदी डेंजर लेवल को पार कर सकती है। मुंगेर के निचले इलाकों में गंगा नदी का पानी पूरी तरह से फैलने लगा है। जिससे निचले इलाकों में बाढ़ सा नजारा देखने को मिल रहा है। जिले में गंगा का वार्निंग लेवल 38.33 मीटर है, जबकि शुक्रवार की दोपहर नदी का जलस्तर 37.78 मीटर पर पहुंच चुका है, जो महज 54 सेंटीमीटर डेंजर लेवल से नीचे है। प्रति घंटे एक सेंटीमीटर की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि हो रही है। जबकि डेंजर लेवल जिले में 39.33 मीटर है, इस प्रकार जिले में गंगा नदी खतरे के निशान से डेढ़ मीटर के करीब नीचे बह रही है। जबकि पटना के गांधी घाट तथा हथीदह में गंगा नदी का जलस्तर डेंजर लेवल को पार कर गया है।

तारापुर दियारा, जाफरनगर, कुतलूपुर, टीकारामपुर सहित बरियारपुर के निचले हिस्सों में फैला बाढ़ का पानी
मुंगेर में गंगा नदी से सटे निचले इलाकों में बाढ़ का पानी फैलना तेजी से जारी है। ऐसी परिस्थितियों में तटवर्ती इलाकों के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे ज्यादा परेशानी तो मवेशियों को लेकर है। पानी में घुसकर लोग अपने मवेशियों के लिये चारा उपलब्ध कराने को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। तो वहीं गंगा नदी के रौद्र रुप को देखते हुए तटवर्ती इलाकों के लोग अपनी जानमाल की रक्षा को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायाण करना शुरु कर दिया है। लोगों को ऊंचे स्थानों पर पहुंचाने के लिये आपदा प्रबंधन की ओर से 84 प्राईवेट नाव का पंजीकरण किया गया है। इसके अलावा भी जरूरत के अनुसार जिला प्रशासन के साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से तैयारी की गई है।
जलस्तर डेंजर लेवल पार करने के बाद ही प्रशासन से राहत
सबसे बड़ी परेशानी प्रभावित लोगों के लिये यह है कि निचले इलाकों में गंगा का पानी फैलने के बाद भी कोई सहायता नहीं मिलती है, जब तक कि गंगा नदी का जलस्तर डेंजर लेवल को पार नहीं कर जाता है। उधर सदर प्रखंड की सबसे अधिक निचला इलाका जाफरनगर, कुतलूपुर, तारापुर दियारा टीकारामपुर महुली, तौफिर सहित बरियारपुर के विभिन्न पंचायतों में शुरुआती दौर में ही लोगों के समक्ष कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो जाती है। सबसे अधिक परेशानी मवेशियों को सुरक्षित रखने के साथ ही उसके लिये चारा उपलब्ध कराना होता है। प्रशासनिक स्तर पर आश्रय स्थल पर ही भोजन सहित पशुओं के लिये सूखा चारा की व्यवस्था की जाती है।
बाढ़ आने पर जिले के छह पंचायतों के 24 हजार से भी अधिक आबादी होते हैं प्रभावित
सबसे अहम बात तो यह है कि जिले में बाढ़ आने पर लगभग 24 हजार से भी अधिक लोग प्रभावित होते हैं। बाढ़ तथा कटाव से परेशान टीकारामपुर, आदर्श ग्राम टीकारामपुर सहित अन्य क्षेत्र को लोगों ने बचाव को लेकर भी बार-बार आवाज उठाते रहते हंै लेकिन इसके स्थाई सामाधान को लेकर प्रयास नहीं किया गया , जिसके कारण हर साल लोगों को बाढ़ तथा कटाव जैसी त्रासदी से परेशान होना पड़ता है। टीकारामपुर के राकेश यादव, विवेकानंद यादव, सहित कई लोगों ने गांव को कटाव से बचाने के लिये बंडाल बनाने की मांग करते रहे हैं।
बोले अधिकारी
निचले इलाकों में फैल रहे गंगा नदी के पानी को देखते हुए जरूरत के अनुसार नाव उपलब्ध कराया गया है, जिससे कि प्रभावित लोग ऊंचे स्थानों की अेर जा सके। इसके अलावा डेंजर लाइन पार करने के बाद चयनित 72 आश्रय स्थल पर भोजन, पानी , रहने ठहरने के साथ ही सरकारी गाइडलाइन के अनुसार प्रभावित लोगों को सुविधा प्रदान की जाएगी। -कुमार अभिषेक, एसडीओ सदर सह प्रभारी जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारी मुंगेर।



