राज्यसभा चुनाव : MGB के 4 विधायकों के वोट ना देने से कैसे बदला समीकरण, एनडीए को मिल गई जीत
बताया जाता है कि पटना में रहते हुए भी चार विधायक मतदान करने विधानसभा परिसर नहीं पहुंचे और एनडीए ने सभी सीटों पर फतह पा ली। खुद तेजस्वी यादव को भी इस स्थिति का पहले से अहसास नहीं हो पाया।

राज्यसभा चुनाव में अपने विधायकों को गोलबंद रहने में विपक्ष कामयाब नहीं रहा। पांचवीं सीट पर पूरी जोर लगाने के बाद भी उसे मुंह की खानी पड़ी। कांग्रेस की तीन और राजद के एक को मिलाकर कुल चार विधायकों की गैर हाजिरी ने राज्य सभा चुनाव का पूरा समीकरण एनडीए के पक्ष में कर दिया और पहली वरीयता में राजद प्रत्याशी से 7 वोटों से पीछे रहे शिवेश कुमार दूसरी वरीयता के वोटों से बाजी मारने में कामयाब हो गये।
राज्यसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद पर्याप्त संख्या बल नहीं होते हुए भी महागठबंधन की ओर से राजद ने अमरेन्द्र सिंह को चुनावी मैदान में उतारा। जीत सुनिश्चित करने को लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कमान अपने हाथों में ले रखी थी। 35 विधायकों (राजद के 25, कांग्रेस के 6, वाम के तीन और आईआईपी के एक) के आधार पर खड़ा हुआ यह अभियान ऐन एक दिन पहले एआईएमआईएम के 5 और बसपा के एक विधायक के समर्थन की घोषणा से जीत के लिए वांछित 41 की संख्या तक पहुंच भी गया था।
विधायकों को एकजुट करने के लिए एक होटल में रखा भी गया लेकिन यहीं से मामला तब फिसलने लगा जब कुछ विधायक होटल नहीं पहुंचे। सोमवार को सुबह से ही उन्हें फोन लगाया जाने लगा लेकिन इनके सारे नम्बर पहुंच से बाहर रहे। बताया जाता है कि पटना में रहते हुए भी चार विधायक मतदान करने विधानसभा परिसर नहीं पहुंचे और एनडीए ने सभी सीटों पर फतह पा ली। खुद तेजस्वी यादव को भी इस स्थिति का पहले से अहसास नहीं हो पाया। मतदान से गैर हाजिर रहे महागठबंधन के चारो विधायक विधानसभा चुनाव 2025 में कम अंतर से ही चुनाव जीते हैं।
एनडीए के चार प्रत्याशियों के अतिरिक्त 12 मत शिवेश कुमार को मिले
प्रथम वरीयता में नीतीश कुमार व नितिन नवीन को 44-44, रामनाथ ठाकुर व उपेन्द्र कुशवाहा को 42-42 मत मिले। शिवेश को 30 और अमरेन्द्रधारी सिंह को 37 वोट मिले, जो जीत के लिए जरूरी 41 मत से कम थे। चार विधायकों की अनुपस्थिति के बाद जीत के लिए वोट की गणना 239 विधायकों की संख्या के आधार पर की गयी। पांच सीटों के लिए मतदान हुआ। मानक के अनुसार उसमें एक जोड़कर (6) उससे 239 विधायकों की संख्या में भाग दिया गया, जो 39.84 आया। अर्थात, जीत के लिए 40 विधायकों का समर्थन आवश्यक था। जिन्हें इससे अधिक वोट मिले, उनके अतिरिक्त मत दूसरी वरीयता के रूप में पांचवें उम्मीदवार के पास चला गया।


