आंध्र प्रदेश से लौटे बिहार के चार मजदूरों की एक-एक कर हो गई मौत, 6 से अधिक की हालत गंभीर; सनसनी

Nishant Nandan हिन्दुस्तान, एक संवाददाता, कसबा, पूर्णिया
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मृतकों के परिजनों का आरोप है कि काम नहीं करने पर कमरे में बंद कर तब तक मारा जाता था, जब तक कि वे फिर से काम करना शुरू नहीं कर देते थे। पत्थर की डस्ट से करीब आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर बीमारी के शिकार होते चले गये।

आंध्र प्रदेश से लौटे बिहार के चार मजदूरों की एक-एक कर हो गई मौत, 6 से अधिक की हालत गंभीर; सनसनी

आंध्र प्रदेश की एक फैक्ट्री में पत्थर घिसाई का काम करने वाले चार श्रमिकों की घर लौटने के बाद एक-एक कर मौत हो चुकी है। मामला बिहार के पूर्णिया जिले के कसबा प्रखंड की गुरही पंचायत का है। जियनगंज गांव एवं इसके आसपास के क्षेत्र के करीब एक दर्जन मजदूर आंध्र प्रदेश काम करने गए थे। ये सभी बीमार होने पर घर लौटे। इनमें चार की मौत हो चुकी है। वहीं, आधा दर्जन से अधिक श्रमिकों की हालत नाजुक बतायी जा रही है। पत्थर घिसाई में डस्ट से बीमारी पकड़ने की आशंका है।

21 वर्षीय असद आलम ने बताया कि आंध्र से लौटे उनके भाई मो. मसद (22 वर्ष) की मंगलवार को मौत हो गई। इससे पहले जियनगंज गांव के स्व. शेख भज्जू के पुत्र मो. मुस्तफा (50 वर्ष) और 28 मई को तारानगर के कुंदन कुमार (25) की मौत हुई। दो दिन पहले सर्रा बथनाह के अरविंद ऋषि (18 वर्ष) की जान गई। इस बीच, एसपी स्वीटी सहरावत ने बताया कि मंगलवार को गुरही पंचायत में श्रमिक की मौत के बाद पुलिस को जानकारी दी गयी। मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया है। परिजनों के आवेदन मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।

फेफड़े में डस्ट जमने से मौत की आशंका

डॉक्टरों के अनुसार पत्थर घिसाई के दौरान निकलने वाली डस्ट के फेफड़े में जमने से उनकी मौत हुई है। मृत श्रमिक के भाई असद आलम ने बताया कि जियनगंज गांव के मो. राजी (22 वर्ष) की हालत नाजुक है। डॉक्टरों ने जवाब दे दिया है। अभी घर पर जिन्दगी व मौत से जूझ रहा है। वहीं इसी गांव के दानिश (23) की हालत नाजुक है। इनका इलाज पीएमसीएच पटना में चल रहा है। इसी गांव के संतोष ऋषि के पुत्र एवं स्व. जक्कों ऋषि के पुत्र की हालत गंभीर है। आंध्र प्रदेश से आये लालो ऋषि, अशोक ऋषि, अजय ऋषि का इलाज चल रहा है।

सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद कनौजिया ने बताया कि पत्थर घिसाई के दौरान उससे निकलने वाली डस्ट से लोगों को फेफड़े की कई तरह बीमारियां हो सकती हैं। पत्थर की डस्ट से फेफड़ा व श्वास नली प्रभावित होती है। इन श्रमिकों को क्या दिक्कत है, जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जियनगंज गांव के ठेकेदार जुनेद गुरही पंचायत के एक दर्जन लोगों को काम करवाने आंध्र प्रदेश लेकर गये थे। जहां फैक्ट्री में पत्थर घिसाई का काम करवाया जाता था।

मारपीट कर काम करवाने का आरोप

मृतकों के परिजनों का आरोप है कि काम नहीं करने पर कमरे में बंद कर तब तक मारा जाता था, जब तक कि वे पुन: काम करना शुरू नहीं कर देते थे। पत्थर की डस्ट से करीब आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर बीमारी के शिकार होते चले गये। बीमारी अधिक होने पर सभी को घर भेज दिया गया। ग्रामीण आरोपी ठेकेदार की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

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Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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