बिहार में अपहरण उद्योग एक एसपी ने शुरू करवाया, पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने किस IPS पर फोड़ा बम

Jayesh Jetawat लाइव हिन्दुस्तान, पटना
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पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि बिहार में अपहरण उद्योग की शुरुआत किसी अपराधी ने नहीं बल्कि एक आईपीएस अधिकारी ने की थी। उस समय बेतिया (पश्चिम चंपारण) के एसपी रहे एक आईपीएस ने अपराधियों से सांठगांठ कर उन्हें डकैती के बजाय किडनैपिंग का सुझाव दिया था।

बिहार में अपहरण उद्योग एक एसपी ने शुरू करवाया, पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने किस IPS पर फोड़ा बम

बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय ने सियासी गलियारे में भूचाल ला दिया है। उन्होंने दावा किया है कि बिहार में अपहरण उद्योग किसी गैंग या अपराधी ने नहीं, बल्कि भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के एक अधिकारी ने शुरू किया था। उन्होंने कहा कि बेतिया के एसपी रहते हुए एक आईपीएस ने डकैतों से सांठगांठ कर ली थी और अपराधियों को सुझाव दिया कि वे अमीर लोगों को किडनैप करें और पैसे लेने के बाद उन्हें छोड़ दें।

पटना एयरपोर्ट पर गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि एक समय था जब बेतिया और बगहा (पश्चिम चंपारण) में कई डाकुओं के गैंग सक्रिय थे। उस समय पुलिस मुख्यालय से जिलों को डकैती की घटनाओं को रोकने के लिए दबाव बनाया जाता था। तब बेतिया के तत्कालीन एसपी डकैती रोकने में नाकामयाब रहे तो उन्होंने अपराधियों के साथ समझौता कर लिया था।

पूर्व डीजीपी ने दावा किया कि उस एसपी ने अपराधियों को समझाया कि डकैती बहुत बड़ा अपराध होता है और ऐसी घटनाओं में पुलिस का प्रेशर बढ़ जाता है। तब तत्कालीन एसपी ने डकैतों से कहा था कि वे सीधे डाका डालने के बजाय पैसे वाले लोगों का अपहरण करें और फिरौती लेकर उन्हें छोड़ दें।

पूर्व डीजीपी ने किस आईपीएस पर लगाए आरोप?

गुप्तेश्वर पांडेय ने यह भी दावा किया है कि उस आईपीएस अधिकारी की इसी रणनीति के बाद बिहार में अपहरण की घटनाओं की शुरुआत हुई और धीरे-धीरे यह पूरे राज्य में फैल गया। हालांकि, जब पत्रकारों ने गुप्तेश्वर पांडेय ने उस अधिकारी के बारे में पूछा तो उन्होंने पूरा नाम नहीं बताया।

पांडेय ने संकेत देते हुए कहा कि उनका नाम डैस डैस यादव जैसा था। वे आंध्र प्रदेश कैडर के अधिकारी थे जो उस समय बिहार में प्रतिनियुक्ति पर आए थे। पूर्व डीजीपी ने यह भी कहा कि उस समय के जितने भी पुराने पुलिस अधिकारी है, सभी यह बात जानते हैं।

IPS की नौकरी छोड़ने के बाद कथावाचक बन गए गुप्तेश्वर पांडेय

1987 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के डीजीपी रह चुके हैं। सितंबर 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने वीआरएस ले लिया था। इससे पहले उन्होंने बिहार पुलिस में लंबा वक्त बिताया। वे बिहार पुलिस अकादमी के डीजी रहे। उन्होंने एसपी से लेकर आईजी तक के पद भी संभाले थे। बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में बिहार डीजीपी रहते उन्होंने मुंबई पुलिस की जांच पर सवाल उठाए थे।

गुप्तेश्वर पांडेय के वीआरएस लेने के बाद चर्चा चली थी कि वे 2020 का बिहार विधानसभा चुनाव लड़ सकते हैं। वे नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू में शामिल हुए थे। मगर उन्हें टिकट नहीं मिला था। हालांकि, बाद में उन्होंने राजनीति छोड़ दी और अध्यात्म का रास्ता चुना। अब वे कथावाचक बन गए हैं।

(हिन्दुस्तान ब्यूरो के इनपुट के साथ)

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लेखक के बारे में

Jayesh Jetawat

जयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।

जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।

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