Bihar Flood: हर घंटे एक सेंटीमीटर बढ़ रही गंगा; बिहार के भागलपुर में बाढ़ से हाहाकार, हजारों लोग विस्थापित
Bihar Flood: भागलपुर जिले में पिछले 48 घंटे के अंदर गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सुल्तानगंज, भागलपुर और कहलगांव में गंगा का पानी खतरे के निशान को पार कर एचएफएल के नजदीक पहुंच रहा है।

Bihar Flood: बिहार के भागलपुर जिले में गंगा का रौद्र रूप जारी है। बीते दो दिनों से प्रतिघंटे एक सेमी की बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में संभावना है कि भागलपुर जिले में सर्वकालिक उच्चतम जलस्तर (एचएफएल) का रिकॉर्ड टूट सकता है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट और पटना में बाढ़ की हालत देखकर जल संसाधन विभाग ने भागलपुर डिवीजन को अलर्ट जारी किया है। विभाग ने कार्यपालक अभियंताओं को कहा कि वे तटबंधों पर कनीय अभियंता (जेई) की तैनाती करें और जलस्तर से संबंधित प्रतिघंटे की रिपोर्ट लें।
जिले में पिछले 48 घंटे के अंदर गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। सुल्तानगंज, भागलपुर और कहलगांव में गंगा का पानी खतरे के निशान को पार कर एचएफएल के नजदीक पहुंच रहा है। यदि पानी के बढ़ने की यही रफ्तार बनी रही तो भागलपुर में गंगा अपने सर्वकालिक रिकॉर्ड को तोड़ सकती है। मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान ने बताया कि जल संसाधन विभाग इस स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। नए रिकॉर्ड को लेकर विभाग में चिंता बनी हुई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भागलपुर में गंगा का एचएफएल 34.86 मीटर है। जो 2021 में आई बाढ़ के समय बना। वर्तमान में यहां जलस्तर खतरे के निशान (33.68 मीटर) से 58 सेंटीमीटर ऊपर यानी 34.26 मीटर पर पहुंच चुका है। जबकि रिकॉर्ड स्तर से महज 60 सेंटीमीटर दूर है। वहीं, सुल्तानगंज में गंगा खतरे के निशान (34.50 मीटर) से 1.92 मीटर ऊपर यानी 36.42 मीटर पर बह रही है। यहां एचएफएल से मात्र 33 सेमी नीचे है। कहलगांव में जलस्तर खतरे के निशान (31.09 मीटर) से 1.28 मीटर ऊपर उठकर 32.37 मीटर पर पहुंच गया है, जो इसके उच्चतम स्तर (32.87 मीटर) के बेहद करीब है। एचएफएल से मात्र 50 सेमी नीचे है।
गंगा के इस रौद्र रूप को देखते हुए जल संसाधन विभाग और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जल विशेषज्ञों के अनुसार, तटबंधों की ऊंचाई हमेशा उच्चतम जलस्तर को ध्यान में रखकर ही तय की जाती है। सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता गोपाल चंद्र मिश्रा के मुताबिक, जलस्तर में बढ़ातरी से यदि नया रिकॉर्ड बनता है, तो भविष्य में सुरक्षात्मक ढांचों में बड़े बदलाव करने होंगे।
अकबरनगर में कई गांवों में फैल रहा गंगा का पानी
अकबरनगर। लाल निशान से ऊपर पहुंच चुके गंगा के जलस्तर के कारण अकबरनगर एवं आसपास के इलाकों में शनिवार को भी बाढ़ का कहर जारी रहा। इंग्लिश चिचरौन, श्रीरामपुर, महेशी, पैन, मकंदपुर, खेरैहिया सहित अन्य इलाकों में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है। कई गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं और लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इधर, अकबरनगर-भागलपुर मुख्य मार्ग एनएच-80 पर भवनाथपुर के पास पानी बहने लगा है। गंगा का पानी बढ़ने के कारण दियारा क्षेत्र का मुख्य सड़क मार्ग से संपर्क पहले ही टूट चुका है। अकबरनगर, महेशी, मकंदपुर और भवनाथपुर पंचायत के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है। शनिवार को मध्य विद्यालय परिसर में शरण लिए दियारा क्षेत्र के ग्रामीणों ने बताया कि वे अपने मवेशियों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
जलस्तर बढ़ने से पीरपैंती में बढ़ी दिक्कत
गंगा के जलस्तर में तेजी से हो रही वृद्धि एवं रुक-रुक कर हो रही बारिश से सम्पूर्ण प्रखंड बाढ़ की चपेट में आने लगा है। टपुआ, रानी दियारा, बाबूपुर, मधुबन, रामनगर, माधोपुर आदि गांवों में भी पानी घुसने लगा है। दियारा क्षेत्र का संपर्क मार्ग चौखंडी पुल टूट ही चुका है। सिंघिया पर भी पानी चढ़ने लगा है। महत्वपूर्ण काली प्रसाद एवं चटाइयां पुल पर भी पानी चढ़ने लगा है।
जानिए जलस्तर की स्थिति
गेज स्थल लाल निशान जलस्तर एचएफएल (मीटर में)
सुल्तानगंज 34.50 36.46 36.75/2021
भागलपुर 33.68 34.26 34.86/2021
कहलगांव 31.09 32.47 32.87/2003
राघोपुर 32.80 33.50 34.53/2024
इस्माईलपुर 31.60 32.40 34.30/2019
बिना लाइफ जैकेट के नाव पर न बैठें: एसडीओ
कहलगांव के अनुमंडल पदाधिकारी राकेश रंजन ने कहा कि अनुमंडल क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सीओ एवं संबंधित पदाधिकारियों से प्रतिदिन स्थिति की रिपोर्ट ली जा रही है। बाढ़ राहत की तैयारियां पूरी कर ली गई है। उन्होंने बताया कि सामुदायिक किचन के संचालन के लिए स्थल का चयन कर लिया गया है। स्वास्थ्य विभाग को भी आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। एसडीओ ने कहा कि नावों के संचालन में सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है। बिना लाइफ जैकेट के किसी भी व्यक्ति को नाव पर बैठाने की अनुमति नहीं होगी।
महादेवपुर घाट का पुराना स्थान गंगा में समाया
गंगा का जलस्तर बढ़ा तो महादेवपुर घाट का वह किनारा भी पानी में समा गया, जहां नवगछिया अनुमंडल के दर्जनों गांवों से लोग अपने परिजनों की अंतिम विदाई देने पहुंचते थे। अब हालात ऐसे हैं कि मौत के बाद भी लोगों की मुश्किलें खत्म नहीं हो रही हैं। अंतिम संस्कार के लिए परिजन सुरक्षित जगह तलाश रहे हैं। शनिवार को विक्रमशिला सेतु के नीचे का नजारा इसी बेबसी की तस्वीर बयां कर रहा था। चारों तरफ गंगा का पानी और बीच में चिता की आग। कहीं परिजन लकड़ियां संभाल रहे थे तो कहीं कर्ता हाथ जोड़कर अपने दिवंगत परिजन को अंतिम विदाई दे रहा था।
सबौर में बाढ़ के पानी का दबाव रेलखंड पर बढ़ा
सबौर प्रखंड क्षेत्र में गंगा के बाढ़ के पानी का दबाव अब सबौर एनएच-80 सड़क पर कम दिख रहा है। अब यह दबाव भागलपुर-साहिबगंज रेलखंड पर चंदेरी के आगे और इंग्लिश फरका गांव के सामने दक्षिण तरफ रेलखंड पर ज्यादा पड़ रहा है। सबौर एनएच सड़क के चौड़ीकरण के बाद सबौर के खानकित्ता चौक से लेकर मसाढ़ू-ममलखा तक एक दर्जन से अधिक पुल-पुलिया और कलभर्ट बनने के बाद पानी सीधा दक्षिण तरफ बहियार में रेलवे लाइन के भमरा से पार कर खानकित्ता-चंदेरी बहियार में प्रवेश कर रहा है। लेकिन रेलवे लाइन चंदेरी के आगे पानी का दबाव ज्यादा है।
17 हजार लोग चार हजार मवेशियों के साथ विस्थापित
भागलपुर के नौ प्रखंडों को बाढ़ प्रभावित घोषित किया गया है। प्रशासन ने जिले में आई बाढ़ का आंकड़ा आपदा प्रबंधन विभाग को उपलब्ध कराया है। एडीएम (आपदा) कुंदन कुमार ने बताया कि अब तक बाढ़ से 17,776 हजार लोग 3,993 मवेशियों के साथ विस्थापित हुए हैं। जिले के नौ प्रखंडों में आई बाढ़ से 28 पंचायतों के 45 गांवों में पानी घुस गया है। नारायणपुर में शहजादपुर, बैकटपुर, दुधैला, सिंघपुर पश्चिम, खरीक में राघोपुर, रंगरा में मदरौनी, कोशकीपुर, सिहोरा, गोपालपुर में बिंदटोली, सबौर में शंकरपुर, ममलखा, रजंदीपुर, फरका, कहलगांव में बीरबन्ना, पीरपैंती में बाखरपुर, नाथनगर में शंकरपुर, रत्तीपुर बेरिया, गोसाईंदासपुर, भुवालपुर, राघोपुर, भतोरिया, रन्नूचक मकंदपुर, बेलखुरिया और रामपुर खुर्द एवं सुल्तानगंज में गनगनिया, तिलकपुर, महेशी, किशनपुर, नवादा और खेरैहिया में पानी से आबादी प्रभावित हुई है।


