राजगीर में पहली बार जनवरी में सूख गईं गंगा-यमुना कुंड की जलधाराएं, क्या है वजह
सिंचाई विभाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता जयदेव प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2010 में केन्द्रीय टीम ने कुंड के जलस्रोतों और धाराओं की स्थिति का अध्ययन किया था। टीम ने कई अनुशंसाएं की थीं। लेकिन, विशेष काम नहीं हुआ।

प्राचीन काल से ऐतिहासिक राजगीर की पहचान 22 कुंड और 52 धाराएं रही हैं। जनवरी में भीषण ठंड के मौसम में गंगा-यमुना कुंड की दो गर्म जल धाराओं के सूखने से लोग हैरान और चिंतित है। सर्द मौसम में पहली बार कुंड की धाराओं से पानी नहीं आ रहा है। कुछ साल पहले गर्मी में इन कुंडों की धाराएं कुंद पड़ी थीं। जानकारों का कहना है कि कुंड क्षेत्र में बोरिंगों की संख्या अधिक होने से ऐसे भयावह हालात बने हैं।
18 मई से राजगीर में एक माह का मलमास मेला शुरू होने वाला है और स्थानीय लोग चिंतित हैं कि कुंड में पानी नहीं होने पर श्रद्धालु स्नान व पूजा-पाठ कैसे करेंगे। सिंचाई विभाग के पूर्व कार्यपालक अभियंता जयदेव प्रसाद ने बताया कि वर्ष 2010 में केन्द्रीय टीम ने कुंड के जलस्रोतों और धाराओं की स्थिति का अध्ययन किया था। टीम ने कई अनुशंसाएं की थीं। लेकिन, विशेष काम नहीं हुआ।
ब्रह्मकुंड पंडा कमेटी के सचिव विकास उपाध्याय ने बताया कि आसपास में उच्चप्रवाही बोरिंग लगाने से कुंडों के जलस्रोतों का पानी भू-गर्भ में चला जाता है। ऐसे में बरसात के बाद कुंड और धाराओं के लिए पानी पहाड़ में नहीं रह पाता है।
क्या है मान्यता और महत्व
पौराणिक मान्यता है कि ब्रह्मा ने यहीं यज्ञ किया था। उसी वक्त उनके मानस पुत्र राजा वसु ने 22 कुंडों, 52 धाराओं का निर्माण करवाया था। वैभारगिरी से आने वाली जलधारा (ब्रह्मकुंड) का तापमान 45 से 50 डिग्री होता है। माना जाता है कि कुंड में स्नान से त्वचा रोग, जोड़ों में दर्द सहित अन्य व्याधियां दूर होती हैं। यहां मकर संक्रांति और मलमास में स्नान का विशेष महत्व है।
सिंचाई विभाग की टीम ने गंगा-जमुना कुंड का अध्ययन किया है। रिपोर्ट आने के बाद जरूरी कार्य होंगे। वहीं, कुंड क्षेत्र के निट उच्चप्रवाही बोरिंग कराने वालों पर कार्रवाई होगी।





