
सीमांचल में सबसे ज्यादा 15 परसेंट वोट बढ़े, मगध ने भी बनाया रिकॉर्ड; खूब हुआ मतदान
सीमांचल के पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिले में मतदाताओं ने वोटिंग के पिछले रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये। मतदान केंद्रों पर महिलाओं और युवाओं की की कतार लगी रही। कुछ एक बूथ पर इवीएम में खराबी के कारण कुछ देरी से चुनाव शुरू हुआ।
बिहार विधानसभा 2025 के चुनाव में राज्य के सभी जिलों में मतदाताओं ने रिकॉर्ड तोड़ मतदान किया है। वहीं, सीमांचल की जनता ने सर्वाधिक हौसला दिखाते हुए आगे बढ़कर लोकतंत्र के इस महापर्व में हिस्सा लिया है। यहां सर्वाधिक 15 प्रतिशत से अधिक मत बढ़े। चुनाव परिणाम को यह रिकॉर्ड कितना प्रभावित करता है, यह तो मतगणना के बाद साफ होगा। मगर बढ़ा हुआ मतदान लोकतंत्र की मजबूती के लिए शुभ संकेत हैं।
सीमांचल में चार जिले किशनगंज, अररिया, कटिहार और पूर्णिया आते हैं। सीमांचल के जिलों में 2020 के विस चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की लड़ाई थी। किशनगंज की चार सीट में दो महागठबंधन तो दो एआईएमआईएम को मिली थी। इस जिले में एनडीए का खाता भी नहीं खुल सका था।
कटिहार की सात में चार एनडीए और तीन महागठबंधन को मिली थी। अररिया की छह सीटों में चार एनडीए, एक महागठबंधन और एक एआईएमआईएम को मिली थी। वहीं, पूर्णिया में सात में चार एनडीए, एक महागठबंधन तथा दो एआईएमआईएम को मिली थी। 2025 के विधानसभा चुनाव में कटिहार में सर्वाधिक 79.10, जबकि किशनगंज में 78.16 प्रतिशत मत पड़े।
सीमांचल के पूर्णिया, किशनगंज और कटिहार जिले में मतदाताओं ने वोटिंग के पिछले रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिये। मतदान केंद्रों पर महिलाओं और युवाओं की की कतार लगी रही। कुछ एक बूथ पर इवीएम में खराबी के कारण कुछ देरी से चुनाव शुरू हुआ। वहीं केनगर प्रखंड के कसबा विधानसभा-58 में पड़ने वाले झुन्नीइस्तम्ब्रार पंचायत के देवी नगर गांव निवासी आदिवासी समुदाय के लोगों ने रोड नहीं तो वोट नहीं की बात पर वोट का बहष्किार कर दिया।
बाद में प्रशासन के समझाने पर दोपहर एक बजे के बाद प्राथमिक वद्यिालय देवीनगर मतदान केंद्र पर मतदान शुरू हुआ। अररिया जिले में ईवीएम में आशिक गड़बड़ी, कांग्रेस-भाजपा कार्यकताओं के बीच हंगामा-प्रदर्शन व पुल के लिए वोट वहष्किार के बीच मंगलवार को मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हुआ। खासकर फर्स्ट टाइम वोटर व महिला वोटरों में मतदान को लेकर काफी उत्साह देखा गया।
मगध ने भी बनाया रिकॉर्ड
मगध के आठ जिलों में मतदाताओं ने बंपर वोटिंग की है। पहले चरण में पटना, नालंदा और शेखपुरा तो दूसरे चरण में मगध प्रमंडल के पांच जिलों में बूथों पर लंबी कतार लगी रही। पटना, नालंदा, शेखपुरा में सात फीसदी तो मगध के जिलों में दस फीसदी ज्यादा मतदान हुआ। 2020 में मगध इलाके में एनडीए पर महागठबंधन भारी पड़ा था। इस क्षेत्र के 49 में से 30 सीटों पर महागठबंधन दलों ने जीत हासिल की थी, जबकि एनडीए को मात्र 19 सीटों पर सफलता मिली थी।
जहानाबाद, अरवल, औरंगाबाद में एनडीए का खाता तक नहीं खुल सका। नवादा की पांच में से चार सीटों पर महागठबंधन को जीत मिली थी। सिर्फ नालंदा और गया जिले में ही एनडीए को महागठबंधन से अधिक सीट मिली, जबकि शेखपुरा में एक-एक की बराबरी पर छूटे थे। गया जिले की 10 में 6 सीटें इमामंज, बाराचट्टी, टिकारी, गया शहर, बेलागंज पर एनडीए, जबकि चार गुरुआ, शेरघाटी, बोधगया, अतरी पर महागठबंधन ने जीत दर्ज की थी।
इसी तरह नवादा ( पांच में एक वारिसलीगंज सीट एनडीए (भाजपा) ने जीती, जबकि चार अन्य सीट (रजौली, नवादा, गोबिंदपुर, हिसुआ) पर महागठबंधन का कब्जा हुआ था। जहानाबाद की तीनों सीटें महागठबंधन ने जीती। इनमें दो सीट जहानाबाद और मखदुमपुर राजद को जबकि घोसी माले के खाते में गिरी थी।
औसत मत प्रतिशत
जिला-2020-2025
गया जी-58.65-68.78
नवादा-55.72-57.86
जहानाबाद-54.80-65.39
अरवल-55.36-63.88
औरंगाबाद-55.58-65.47
नालंदा-52.62-59.81
पटना-52.38-59.02
शेखपुरा-54.69-61.99
औरंगाबाद में एनडीए को एक भी सीट नहीं मिली थी
औरंगाबाद जिले में एनडीए को एक भी सीट नहीं मिली थी। सभी छह सीट महागठबंधन को मिली थी। पटना की 14 सीटों में से पांच बाढ़, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना साहिब पर एनडीए, जबकि नौ सीटें मोकामा, बख्तियारपुर, फतुहा, दानापुर, मनेर, फुलवारी, मसौढ़ी, पालीगंज और बिक्रम पर महागठबंधन का कब्जा था। नालंदा की सात में छह पर एनडीए, जबकि एक पर राजद का कब्जा था। शेखपुरा में एक जदयू, जबकि दूसरी राजद के कब्जे में रही थी।





