ये मेरा नंबर नहीं है.., बिहार में 7 लाख उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी सिम; धोखाधड़ी का खेल

Nishant Nandan हिन्दुस्तान, मुख्य संवाददाता, पटना
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फर्जी तरीके से अन्य उपभोक्ताओं के नाम से नंबर इस्तेमाल करने में बिहार छठे स्थान पर है। इसमें सबसे अधिक यूपी, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, एमपी, महाराष्ट्र है। इन राज्यों के उपभोक्ताओं के नाम से फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया था।

ये मेरा नंबर नहीं है.., बिहार में 7 लाख उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी सिम; धोखाधड़ी का खेल

बिहार में उपभोक्ताओं को जानकारी नहीं और उनके नाम से सिम खरीद कर दूसरा कोई इस्तेमाल कर रहा था। ऐसा एक-दो लोगों के साथ नहीं बल्कि राज्य के 7,00,979 उपभोक्ताओं के साथ हो रहा था। दूरसंचार विभाग के संचार साथी एप और पोर्टल पर 14 लाख 30 हजार 614 उपभोक्ताओं ने नंबर जांच करने के लिए आवेदन किया था। इसमें सात लाख से अधिक उपभोक्ताओं के नाम से फर्जी तरीके से सिम लेकर उसका इस्तेमाल करने का मामला सामने आया।

बता दें कि संचार साथी एप और पोर्टल पर इसकी सुविधा है कि उपभोक्ता अपने नाम से चल रहे नंबर की जांच कर सकते हैं। इसकी जानकारी तुरंत मिल जाती है। इसको लेकर साइबर ठगी से बचने के लिए लाखों उपभोक्ता अपने नाम से नंबर की जांच करवा रहे हैं। वर्ष 2023 जुलाई से जुलाई 2025 तक 14 लाख से अधिक उपभोक्ताओं ने नंबर जांच के लिए संचार साथी एप पर आवेदन किया था।

इसमें 11 लाख 84 हजार 945 उपभोक्ताओं के नंबर की जांच हुई है। इसमें छह लाख से अधिक उपभोक्ताओं के नाम से फर्जी तरीके से नंबर लेकर इस्तेमाल किया जा रहा था। वहीं दो लाख 68 हजार 211 उपभोक्ताओं ने कहा कि संबंधित नंबर को बंद कर दिया जाए, क्योंकि इस नंबर की उन्हें जरूरत नहीं है।

फर्जी नंबर बंद करवाने में बिहार देशभर में छठे स्थान पर

फर्जी तरीके से अन्य उपभोक्ताओं के नाम से नंबर इस्तेमाल करने में बिहार छठे स्थान पर है। इसमें सबसे अधिक यूपी, राजस्थान, आंध्रप्रदेश, एमपी, महाराष्ट्र है। इन राज्यों के उपभोक्ताओं के नाम से फर्जी नंबर का इस्तेमाल किया था। देशभर के 38 लाख 17 हजार 446 उपभोक्ताओं ने कहा कि संबंधित नंबर मेरे नाम से है, लेकिन अब उसकी जरूरत नहीं है। इसे बंद कर दिया जाए।

सिम के लिए फर्जी पहचान पत्र देने वाला देवघर से धराया

इधर आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने सिम बॉक्स से साइबर ठगी मामले में झारखंड के देवघर से मुकेश महतो नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। डीआईजी (साइबर) संजय कुमार ने प्रेस वार्ता में बताया कि आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर बिहार लाया जा रहा है। उससे विस्तृत पूछताछ की जायेगी। डीआईजी ने कहा कि ईओयू को जानकारी मिली थी कि देवघर के कारो थाना इलाके के निवासी मुकेश महतो ने ही वैशाली के मो. सुल्तान को बड़ी मात्रा में फर्जी पहचान पत्र उपलब्ध कराये थे।

इसके आधार पर पीओएस के माध्यम से सैकड़ों सिम जारी हुए, जिनका इस्तेमाल सुपौल में बरामद सिम बॉक्स से साइबर ठगी में किया गया। छापेमारी के दौरान मुकेश महतो के ठिकाने से बड़ी संख्या में आयुष्मान कार्ड सहित कई पहचान पत्र बरामद हुए हैं। इसके साथ ही उसके मोबाइल में वैशाली के मो. सुल्तान से हुई चैटिंग के भी सबूत मिले हैं। सिम बॉक्स मामले में 21 जुलाई को सबसे पहले सुपौल से हर्षित कुमार को गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद भोजपुर में भी छापेमारी कर सिम बॉक्स की बरामदगी हुई थी।

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लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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