NMCH में मरीजों की जान से खिलवाड़? फर्जी डॉक्टर कर रहा था इलाज; इन्टर्नशीप में भी मुन्ना भाईगिरी
एनेस्थिशिया विभाग में निरीक्षण के दौरान भाई के बदले ड्यूटी कर रहे डॉक्टर को पकड़ा गया। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।

बिहार के बड़े मेडिकल कॉलेज एनएमसीएच में मरीजों की जान से खिलवाड़ का बड़ा मामला उजागर हुआ है। शनिवार को अस्पताल प्रबंधन उस समय चौंक पड़ा जब एक फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया। वह फर्जी पहचान पत्र के जरिए अस्पताल में मरीजों का इलाज कर रहा था। इस घटना से मेडिकल कॉलेजों में चल रहे बड़े झोल का पर्दाफाश हो गया है।
एनएमसीएच के एनेस्थिशिया विभाग में शनिवार को यूनिट वन के निरीक्षण के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. प्रो. विजॉय कुमार पहुंचे। वहां मरीजों का इलाज कर रहे युवक की गतिविधियों पर शंका हुई। जब मामले की जांच की गई तो जालसाजी का मामला सामने आया। दरअसल विभाग में मरीजों का इलाज कर रहे युवक ने जो नाम बताया वह उसके आधार से नहीं मिल पा रहा था। इसके बाद उससे पूछताछ की गयी तो पता चला कि एक इंटर्न के नाम पर उसका रिश्तेदार ड्यूटी कर रहा है।
विभागाध्यक्ष द्वारा मामले की जानकारी दिए जाने के बाद अस्पताल प्रशासन ने घटना की जानकारी आलमगंज थाने को दी गई। पुलिस पहुंची तो छानबीन में सच्चाई सामने आ गई। अस्पताल प्रबंधन की शिकायत पर पुलिस ने उस युवक को गिरफ्तार कर लिया। जिस रिश्तेदार के बदले वह काम कर रहा था उसपर भी कार्रवाई जाएगी। पकड़ा गया डॉक्टर खुद को इंटर्न का भाई बताया। सवाल है कि अगर वह गलत नीयत से किसी मरीज का गलत इलाज कर देता तो क्या होता। इंटर्न डॉक्टरों की शिकायत पर यह कार्रवाई की गयी है।
अस्पताल प्रशासन ने कहा है कि मामले की विस्तृत जांच कराई जा रही है। साथ ही अस्पताल में कार्यरत सभी इंटर्न और कर्मियों का पहचान सत्यापन की प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। इस मामले में आलमगंज थानाध्यक्ष राहुल कुमार ठाकुर ने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि डॉक्टर के बदले उसका भाई ड्यूटी कर रहा था। दोनों से पूछताछ की जा रही है।
इस घटना से बिहार में मेडिकल सेवाओं की पोल खुल गई है। पहले से भी डॉक्टरों पर ड्यूटी में लापरवाही के आरोप लग रहे थे। फर्जी डॉक्टर की गिरफ्तारी से इस पर मुहर लग गई है। आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले इंटर्न और प्रशिक्षु डॉक्टर पैसा बनाने के लिए निजी नर्सिंग होम में नियमविरुद्ध काम करते हैं। इन डॉक्टरों की मिलीभगत से सरकारी अस्पतालों से मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने का खेल भी चलता है। सरकारी अस्पतालों के आसपास प्राइवेट हॉस्पिटल्स बड़ी संख्या में खुल गए हैं।

लेखक के बारे में
Sudhir Kumarटीवी, प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में लगभग 18 साल का अनुभव रखने वाले सुधीर कुमार लाइव हिन्दुस्तान में अगस्त 2021 से बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर/को-ऑर्डिनेटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में हिन्दुस्तान दैनिक से इंटर्न के रूप में करियर की शुरुआत की। सुधीर ने लंबे समय तक ईटीवी/न्यूज18 में रिपोर्टर के रूप में बिहार और झारखंड में काम किया। दोनों राज्यों की राजनीति के साथ क्राइम, भूगोल और कल्चर की समझ रखते हैं। झारखंड में नक्सली वारदातों की कवरेज के साथ बिहार के चर्चित बालिकागृह कांड की पहली टीवी रिपोर्टिग कर गुनाहगारों का चेहरा उजागर किया। सुधीर ने स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के मुद्दों को कवर किया है और ह्यूमैन रिलेशन्स पर भी लिखते हैं। साइंस बैकग्राउंड के विद्यार्थी सुधीर कुमार ने इंदिरा गांधी नैशनल ओपन यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा किया है। डिजिटल कंटेंट क्रिएशन में खास रूचि रखते।
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