25 हजार की उगाही, सर्टिफिकेट छीनकर बंधक; सरकारी नौकरी के नाम पर क्रूरता का खेल, 105 मुक्त
छापेमारी के दौरान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के धरमपुर, मुसापुर समेत विभिन्न इलाकों से 105 बंधकों को सुरक्षित निकाला गया। मुक्त कराए गए लोगों में 67 युवक और 38 युवतियां शामिल हैं। इनमें बालिगों के साथ नाबालिग बच्चे बच्चियां भी शामिल हैं।

Bihar News: बिहार में सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बंधक बनाकर रखे गए 105 युवक-युवतियों व नाबालिगों को मिशन मुक्ति फाउंडेशन, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्यों एवं समस्तीपुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मुक्त कराया गया। बुधवार देर रात से गुरुवार सुबह तक चली छापेमारी के दौरान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के धरमपुर, मुसापुर समेत विभिन्न इलाकों से सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। मुक्त कराए गए लोगों में 67 युवक और 38 युवतियां शामिल हैं। इनमें बालिग और नाबालिग दोनों वर्ग के लोग हैं। कार्रवाई के बाद सभी को बसों के माध्यम से मुफस्सिल थाना लाया गया, जहां उनकी पहचान, पते एवं अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है।
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर प्रत्येक युवक-युवती से करीब 25 हजार रुपये की राशि ली जाती थी। इसके बाद उन्हें जिले के अलग-अलग स्थानों पर रखकर बंधक बना लिया जाता था और उनके मूल प्रमाण पत्र जब्त कर लिये जाते थे। आरोप है कि इन लोगों पर नेटवर्क मार्केटिंग की तर्ज पर अन्य बेरोजगार युवाओं को जोड़ने और उनसे भी पैसे वसूलने का दबाव बनाया जाता था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने गिरोह से जुड़े कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में भी लिया है। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने फिलहाल मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिक जानकारी देने से परहेज किया है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह के पीछे कौन लोग हैं तथा यह कब से सक्रिय था।
मुफस्सिल थानाध्यक्ष अजीत प्रसाद सिंह ने बताया कि मुक्त कराए गए नाबालिग बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके परिजनों को बुलाकर उन्हें सुपुर्द किया जाएगा। वहीं, बालिग युवक-युवतियों को आवश्यक सत्यापन के बाद उनके घर भेजा जाएगा। पुलिस इस मामले की जांच मानव तस्करी, अवैध बंधक बनाकर रखने, धोखाधड़ी और ठगी जैसे विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर कर रही है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इस गिरोह का नेटवर्क बिहार के विभिन्न जिलों के साथ कई राज्यों में फैला है। इसमें नये लड़के, लड़कियों को लाने के लिए नेटवर्क मजबूत करने के लिए युवाओं को फंसाया जाता है। एक राज्य के लड़के, लड़कियों को रखा जाता है ताकि वे आसानी से भाग नहीं पाएं। उन पर नजर बनाए रखने के लिए दबंग और बदमाश लड़कों को तैनात किया गया है। पुलिस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुट गई है।


