
तिरहुत में 11 फीसदी ज्यादा मतदान, मिथिलांचल में भी मतदाता मेहरबान; इस जिले में सबसे ज्यादा बढ़ी वोटिंग
मिथिलांचल की बात करें तो यहां दरभंगा में सबसे ज्यादा सात फीसदी मतदान बढ़ा है। अन्य जिलों में भी मतदाताओं ने बंपर वोटिंग की है। मिथिलांच के तीन जिले दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर में विधानसभा की कुल 30 सीटें हैं।
तिरहुत प्रक्षेत्र के छह जिले में बिहार की 49 विधानसभा सीटें हैं। पिछली बार (2020) की तुलना में इस बार सभी जिलों के मतदाताओं ने बम्पर वोटिंग की। यह पिछली बार से औसतन 11 फीसदी ज्यादा है। कई चुनावों को देखें तो तिरहुत प्रक्षेत्र में एनडीए का दबदबा रहा है। भाजपा को इस इलाके में सबसे अधिक सीटें मिलती रही हैं। पिछली बार इस प्रक्षेत्र में मुजफ्फरपुर, पूर्वी व पश्चिमी चम्पारण, शिवहर, सीतामढ़ी और वैशाली जिले की 49 सीटों में से केवल भाजपा ने आधे से अधिक 26 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

इसके बाद जदयू ने छह सीटों पर जीत दर्ज की थी। वीआईपी के खाते में एक सीट आई थी जो पिछली बार एनडीए में थी। इस चुनाव में वीआईपी महागठबंधन के साथ है। राजद को 13 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। जबकि कांग्रेस को दो और भाकपा माले को मात्र एक सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी।
मिथिला में एनडीए का रहा है दबदबा
मिथिलांचल की बात करें तो यहां दरभंगा में सबसे ज्यादा सात फीसदी मतदान बढ़ा है। अन्य जिलों में भी मतदाताओं ने बंपर वोटिंग की है। मिथिलांच के तीन जिले दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर में विधानसभा की कुल 30 सीटें हैं।
पिछले दो दशक के चुनावों को देखें तो मिथिलावासी एनडीए पर मेहरबान होते रहे हैं। पिछली बार एनडीए को 30 में से 22 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। वर्ष 2020 के चुनाव में भाजपा ने मिथिलांचल की कुल सीटों में से सबसे अधिक 11 सीटों पर जीत हासिल की थी। यानी एक तिहाई से अधिक सीटें अकेले भाजपा ने जीती थी।
इसके बाद जदयू ने नौ सीटों पर जीत हासिल की थी। उस समय एनडीए की साझेदार वीआईपी ने दो सीट हासिल की थी। 30 में से कुल 22 सीटों पर एनडीए के खाते में आई थी। इस बार वीआईपी महागठबंधन खेमे में है। राजद को सात, वीआईपी दो व माकपा को एक सीट पर जीत मिली थी। ब्राह्मण बहुल इस क्षेत्र में अतिपिछड़ा समुदाय कई विस में निर्णायक साबित होते हैं। ये दोनों एनडीए के कोर वोटर माने जाते हैं। इसका लाभ एनडीए को मिलता रहा है।



