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मधुमक्खियों पर ठंड की मार, 20% ने दम तोड़ा; टेंशन में मधुपालक

मधुमक्खियों पर ठंड की मार, 20% ने दम तोड़ा; टेंशन में मधुपालक

संक्षेप:

बीते एक सप्ताह से धूप नहीं निकली है। चीनी खरीदकर मधुमक्खियों को उसका घोल पिला रहे हैं, ताकि इनकी जान बचाई जा सके। अहियापुर क्षेत्र के मुस्तफापुर निवासी मधुमक्खी पालक राजेश गुप्ता व दिलीप कुमार ने बताया कि एक सप्ताह से परेशानी बढ़ गई है।

Jan 05, 2026 07:36 am ISTNishant Nandan हिन्दुस्तान प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर
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कड़ाके की ठंड का असर मधुमक्खियों पर भी पड़ रहा है। मुजफ्फरपुर समेत बिहार के पांच हजार से अधिक मधुपालक एक माह से यूपी, एमपी, राजस्थान के विभिन्न जिलों में सरसों के खेतों में बॉक्स के साथ डेरा डाले हुए है। बीते एक सप्ताह से कड़ाके की ठंड के कारण मधुमक्खियां बॉक्स से परागण के लिए नहीं निकल पा रही हैं। इससे वे बॉक्स में ही भूख से दम तोड़ दे रही हैं। मधुमक्खी पालकों ने बताया कि धूप नहीं निकलने से अबतक लगभग 20 फीसदी मधुमक्खियां दम तोड़ चुकी हैं। स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो शहद उत्पादन पर असर पड़ेगा।

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एक सप्ताह से नहीं निकली धूप

मुजफ्फरपुर के मीनापुर के मधुपालक राजीव कुमार सिंघानिया ने बताया कि जिले के दो सौ से अधिक मधुपालक मध्य प्रदेश के भिंड जिले के गोहद झाखड़ी में सरसों के खेतों में बॉक्स रखे हुए हैं। बीते एक सप्ताह से धूप नहीं निकली है। चीनी खरीदकर मधुमक्खियों को उसका घोल पिला रहे हैं, ताकि इनकी जान बचाई जा सके। अहियापुर क्षेत्र के मुस्तफापुर निवासी मधुमक्खी पालक राजेश गुप्ता व दिलीप कुमार ने बताया कि एक सप्ताह से परेशानी बढ़ गई है। पैसा नहीं होने से पहले से निकला शहद औने-पौने में बेचकर चीनी खरीद रहे हैं।

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मजबूरी का फायदा उठा रही है कंपनियां

एजेंसियां भी हमारी मजबूरी का फायदा उठा रहीं हैं। मधुपालकों से 80-85 रुपये किलो शहद खरीदकर तत्काल 50 फीसदी राशि ही भुगतान कर रही हैं। वैशाली के विनय कुमार ने बताया कि राजस्थान के अरवल टोंक, भरतपुर में भी भीषण ठंड से परेशानी बढ़ी हुई है। महुआ के सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि यूपी के कानपुर में ठंड के कारण बॉक्स से मधुमक्खियां नहीं निकल पा रही हैं। बॉक्स में भी मधुमक्खियों को भोजन उपलब्ध कराना चुनौती बनी हुई है।

मधुमक्खियों को 10 फरवरी तक बचाना चुनौती

मधुपालक राजीव कुमार सिंघानिया ने बताया कि बिहार के पांच हजार से अधिक मधुपालक मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों में डेरा डाले हुए हैं। ये सभी यहां 10 फरवरी तक रहेंगे। इस बीच जनवरी में पड़ रही कड़ाके की ठंड में मधुमक्खियों को बचाना है। वे मध्य प्रदेश से 10 फरवरी को अयोध्या के लिए रवाना होंगे। तब तक मौसम भी ठीक हो जाएगा। वहां पांच मार्च तक रहेंगे। इसके बाद 10 मार्च तक मुजफ्फरपुर लौटकर मधुमक्खियों के बॉक्स लीची के बगानों में रखे जाएंगे।

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Nishant Nandan

लेखक के बारे में

Nishant Nandan
एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे निशांत नंदन डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले इलेक्ट्रॉनिक/प्रसारण मीडिया में लंबे समय तक काम कर चुके हैं। निशांत ने अपने करियर की शुरुआत ETV बिहार से की थी। इसके बाद वो मौर्य न्यूज, आर्यन न्यूज, न्यूज वर्ल्ड इंडिया जैसे संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम कर चुके हैं। साल 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के साथ डिजिटल पत्रकारिता का सफर शुरू करने के बाद निशांत साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। निशांत मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले हैं। आरा में शुरुआती शिक्षा के बाद इन्होंने नालंदा मुक्त विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। और पढ़ें
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