बिहार में अब बच नहीं सकेंगे अपराधी, बोले डीजीपी विनय कुमार- 13 फॉरेंसिक लैब चालू होंगे, DNA जांच का भी इंतजाम
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि इसके अलावा उन सभी 28 जिलों में जहां क्षेत्रीय एफएसएल नहीं है, वहां पर हमने जिला चलंत प्रयोगशालाओं के लिए भवन का निर्माण पूरा कर लिया है। सभी को फोरेंसिक वैन की सुविधा दी गयी है।
बिहार में अब अपराधियों के लिए अपराध कर बच पाना आसान नहीं है। अपराधियों को उनके मुकम्मल अंजाम तक पहुंचाने के लिए बिहार पुलिस खास इंतजाम कर रही है। बिहार के डीजीपी विनय कुमार ने कहा है कि सात साल से अधिक की सजा वाले सभी कांडों में घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए चार स्थायी व 09 क्षेत्रीय सहित कुल 13 एफएसएल को अगले एक-दो साल में पूर्ण रूप से चालू करा लिया जायेगा।
वे मंगलवार को राजधानी पटना में सरदार पटेल भवन स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय में आयोजित दो दिवसीय फॉरेंसिक बायोलॉजिकल साइंस सैटेलाइट कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन कर रहे थे। इस कांफ्रेंस में केंद्रीय एफएसएल के अधिकारी सहित देश भर के विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं से आये वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं। मौके पर डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि क्षेत्रीय लैब के लिए नियुक्तियां पूरी हो गई हैं। उपकरण खरीद लिए गये हैं। बिल्डिंग का निर्माण भी कर लिया गया है। इन्हें एक-दो साल में पूर्ण रूप से चालू करा लिया जायेगा।
उन्होंने राज्य में डीएनए जांच को लेकर बढ़ रही डिपेंडेंसी को देखते हुए तीन-चार नये लैब स्थापित करने में केंद्रीय एफएसएल से सहयोग का आग्रह किया। डीजीपी ने बताया कि इसके अलावा उन सभी 28 जिलों में जहां क्षेत्रीय एफएसएल नहीं है, वहां पर हमने जिला चलंत प्रयोगशालाओं के लिए भवन का निर्माण पूरा कर लिया है। सभी को फोरेंसिक वैन की सुविधा दी गयी है। उन्होंने कहा कि सभी 44 पुलिस जिलों को 50 मोबाइल फॉरेंसिक वैन दिए गए हैं। आने वाले समय में इन मोबाइल फॉरेंसिक वैन की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। पटना और राजगीर में साइबर फोरेंसिक लैब स्थापित करेंगे।


