बिहार में धरती फाड़कर निकला शिवलिंग आकार का फूल, जलाभिषेक को उमड़ी भीड़
Bihar News: वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग के मुरौवतपुर में रातों-रात शिवलिंग के आकार का विशाल फूल खिलने से पूजा के लिए भीड़ उमड़ पड़ी। हालांकि, जानकार इसे बरसात से पहले निकलने वाला ‘ओल’ का फूल बता रहे हैं।

Bihar News: बिहार के वैशाली जिले के सहदेई बुजुर्ग प्रखंड से आस्था और प्राकृतिक अचरज से जुड़ी एक बेहद हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है। इलाके के मुरौवतपुर पंचायत के वार्ड संख्या 11 में स्थित एक घर के पास रातों-रात जमीन से एक विशालकाय और अद्भुत फूल निकल आया। इस फूल का आकार बिल्कुल भगवान शिव के शिवलिंग जैसा है। जैसे ही ग्रामीणों की नजर इस रहस्यमयी फूल पर पड़ी, यह पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया। आस्था के वशीभूत होकर लोगों की भारी भीड़ वहां जुट गई और इसे दैवीय चमत्कार मानकर पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का दौर शुरू हो गया।
रातों-रात जमीन से निकला अद्भुत फूल
स्थानीय निवासी असर्फी सिंह के घर के पास खिले इस शिवलिंग रूपी फूल को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोगों का भारी तांता लग गया है। ग्रामीण इसे भगवान शिव का साक्षात चमत्कार मान रहे हैं। मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं ने फूल के पास अगरबत्ती जलाई, प्रसाद चढ़ाया और पूरी आस्था के साथ दूध व जल से इसका अभिषेक भी किया। स्थानीय नागरिक गौरी शंकर सिंह ने हैरानी जताते हुए बताया कि एक दिन पहले तक उस जगह पर कुछ भी नहीं था, लेकिन रात भर में अचानक वहां एक विशालकाय शिवलिंग के आकार का यह अद्भुत पुष्प खिल गया, जिसने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है।
क्या यह सचमुच दैवीय चमत्कार है या महज एक फूल?
जहां एक तरफ ग्रामीण इस रहस्यमयी फूल को दैवीय शक्ति और भगवान का रूप मानकर पूज रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ जागरूक लोगों और जानकारों ने इसके पीछे के वैज्ञानिक सच को भी उजागर किया है। जानकारों के मुताबिक, यह कोई दैवीय चमत्कार नहीं, बल्कि जिमीकंद यानी 'ओल' का एक अनोखा फूल है। इस तरह के पुष्प बेहद असामान्य होते हैं और इनसे एक विशिष्ट प्रकार की तेज गंध भी आती है।
बरसात से पहले खिलता है यह विचित्र फूल
जानकारों के अनुसार, इस पौधे की खेती मुख्य रूप से इसके बड़े और स्टार्चयुक्त कंद के लिए की जाती है, जो साउथ एशियाई व्यंजनों में एक बेहद आम और लोकप्रिय सामग्री है। इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके फूल की कली सीधे जमीन को फाड़कर बाहर निकलती है और यह प्रतिवर्ष खिलती है। आमतौर पर यह दुर्लभ नजारा बरसात के मौसम की शुरुआत के आसपास ही देखने को मिलता है। फिलहाल, इस अद्भुत फूल ने विज्ञान और आस्था के बीच एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।


