जोरदार धमाका और लाइब्रेरी पर आ गिरा मलबा, कई छात्र दब गए; दिल्ली हादसे में जिंदा बची सायिका ने सुनाई पूरी कहानी
सायिका ने कहा कि अल्लाह का शुक्र है कि इतने बड़े हादसे में वह बच गई। इधर, घटना की सूचना मिलते ही परिजन घबरा गए थे, लेकिन सायिका के सुरक्षित होने की खबर मिलते ही उन्होंने राहत की सांस ली। उसकी मां मुमताज बेगम रिटायर्ड नर्स हैं।

दिल्ली के साकेत इलाके में शनिवार शाम हुए बिल्डिंग हादसे में पूर्वी चम्पारण जिले की एक एमबीबीएस छात्रा बाल-बाल बच गई। रघुनाथपुर चमड़ा गोदाम निवासी एकराम खान की पुत्री सायिका खान उस समय लाइब्रेरी में पढ़ाई कर रही थी, जब बगल की छह मंजिला इमारत का ऊपरी हिस्सा अचानक लाइब्रेरी पर आ गिरा। सायिका ने बताया कि वह रूस से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लौटी है और इन दिनों दिल्ली में रहकर एमसीआई की तैयारी कर रही थी।
शनिवार शाम करीब साढ़े सात बजे वह लाइब्रेरी से बाहर नाश्ता करने के लिए निकल रही थी, तभी अचानक जोरदार धमाके के साथ बिल्डिंग का हिस्सा गिर पड़ा। इस हादसे में कई छात्र मलबे में दब गए। सायिका को भी पैर में हल्की चोटें आईं, लेकिन वह किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल गई। घटना के बाद उसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद रविवार को डॉक्टरों ने उसे छुट्टी दे दी। हालांकि, हादसे के मंजर से वह अब भी सहमी हुई है। उसने बताया कि उसके सामने ही कई सहपाठी मलबे में दब गए, जिसे वह कभी भूल नहीं पाएगी।
उसने कहा, अल्लाह का शुक्र है कि इतने बड़े हादसे में वह बच गयी। इधर, घटना की सूचना मिलते ही परिजन घबरा गए थे, लेकिन सायिका के सुरक्षित होने की खबर मिलते ही उन्होंने राहत की सांस ली। उसकी मां मुमताज बेगम रिटायर्ड नर्स हैं। पिता एकराम खान ने अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई है। दो पुत्र व दो पुत्रियों को एमबीबीएस कराया है। पड़ोसी रिटायर्ड फौजी नबी रसूल ने भी इसे ईश्वर की कृपा बताया। एकराम खान मूलतः हरसिद्धि थाना के कृतपुर के रहने वाले हैं। वे करीब 40 वर्ष पूर्व रघुनाथपुर में आकर बस गए हैं। उनका ईंट का कारोबार है।
बिहार के 2 इंजीनियरों की मौत
दिल्ली के सैदुलाजाब में हादसे में अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। बिहार के दो इंजीनियरों की भी मौत हुई। इनमें नवादा की डोहढ़ा पंचायत का नलिन और मुजफ्फरपुर इंजीनियरिंग कॉलेज का पूर्व छात्र कपिल शामिल है। कपिल बिहार में कहां का रहने वाला है, यह फिलहाल पता नहीं चल पाया है।
नलिन के ममेरे भाई सोनू ने बताया कि नलिन ने भी मुजफ्फरपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की थी। वह दिल्ली में इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज की तैयारी कर रहा था। रविवार को पराठे खाने का मन हुआ तो एक दोस्त के साथ हॉस्टल से थोड़ी दूर स्थित कैंटीन गया था। इसी बीच, कैंटीन के पास का भवन भरभराकर गिर गया और नलिन व उसके दोस्त चपेट में आ गए। नलिन के पिता किसान हैं।
हादसे की जांच होगी, दो अफसर सस्पेंड
साकेत के सैदुलाजाब में इमारत गिरने से अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आठ लोग घायल हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे की मजिस्ट्रेट जांच कराने के आदेश दिए हैं। वहीं, नगर निगम ने एक असिस्टेंट इंजीनियर और एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार रात को पांच मंजिला व्यावसायिक इमारत अचानक गिर गई। इमारत का मलबा हटाने में रविवार दिनभर कई विभाग जुटे रहे।
रविवार शाम तक मलबे से 14 लोगों को निकाला गया। इसमें से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच लोगों को अस्पताल से उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है, तीन घायल अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। महरौली पुलिस ने गैर इरादतन हत्या सहित बीएनएस की अन्य धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इमारत के मालिक कर्मवीर जेलदार, बिल्डर मनीष खत्री, ठेकेदार सिराज फरार हैं। ठेकेदार सिराज बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला है, जबकि करमवीर वसंतकुंज इलाके में रहता है।
अधिकांश छात्र हुए हादसे का शिकार
मलबे से निकाले गए अधिकांश युवक-युवतियां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और सिविल डिफेंस की टीमें मलबे की तलाश में जुटी रहीं। वहीं हादसे के बाद से मौके पर बड़ी क्रेन नहीं बुलाई गई, जिसके चलते बचाव कार्य की गति धीमी रही। रविवार दोपहर 12 बजे के बाद बचाव कार्य में लगी टीम के लिए दो बड़ी क्रेन मंगवाई गई थी।
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