मंत्री बने रहेंगे दीपक प्रकाश; सम्राट चौधरी ने दूर किया सस्पेंस, भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा के पाले में डाली गेंद?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि दीपक प्रकाश आज भी मंत्री हैं और आगे भी रहेंगे। इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा ने गेंद उपेंद्र कुशवाहा के पाले में डाल दी है। कुशवाहा के बेटे दीपक को एमएलसी नहीं बनाए जाने के बाद उनका मंत्री पद संकट में आ गया था।

राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर संशय फिलहाल दूर हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट कहा कि दीपक आज भी मंत्री हैं और आगे भी बने रहेंगे। माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गेंद कुशवाहा के पाले में डाल दी है। अब रालोमो चीफ को देखना है कि वह अपने बेटे को मंत्री पद पर बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाते हैं। दरअसल, बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश अभी किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। हाल ही में हुए विधान परिषद चुनाव में उन्हें एमएलसी नहीं बनाए जाने के बाद उनके मंत्री पद पर संकट पैदा हो गया था।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को पटना में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि दीपक प्रकाश आज भी मंत्री हैं और आगे भी रहेंगे। सीएम ने स्पष्ट किया कि बिना किसी सदन का सदस्य होने पर कोई भी 5 महीने और 29 दिनों तक मंत्री रह सकता है।
उन्होंने कहा कि वह खुद बिना सदन के सदस्य रहे 5 महीने एवं 28 दिनों तक मंत्री रहे थे। हालांकि, सीएम ने यह नहीं बताया कि आगामी महीनों में दीपक प्रकाश को सदन में कैसे भेजा जाएगा, या फिर 5 महीने 29 दिन की अवधि पूरी होने के बाद वह पद पर कैसे रहेंगे अथवा नहीं रहेंगे।
भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा के पाले में डाली गेंद?
सीएम सम्राट के इस बयान के मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने गेंद उपेंद्र कुशवाहा के पाले में डाल दी है। अब कुशवाहा को यह तय करना है कि अपने बेटे को वह सम्राट कैबिनेट में बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
नई सम्राट चौधरी सरकार में दीपक प्रकाश ने 7 मई को मंत्री पद की शपथ ली थी। नियमों के अनुसार, नवंबर 2026 के पहले सप्ताह तक बिना विधायक या एमएलसी बने वह कैबिनेट में रह सकते हैं। इसके बाद उन्हें किसी भी सदन की सदस्यता लेना आवश्यक होगा, नहीं तो उनका मंत्री पद चला जाएगा। सीएम के बयान से यह स्पष्ट हो गया कि इस अवधि से पहले दीपक से इस्तीफा नहीं लिया जाएगा।
भाजपा ने दीपक प्रकाश को नहीं बनाया एमएलसी
हाल ही में हुए बिहार विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने दीपक प्रकाश को एमएलसी नहीं बनाया। उपेंद्र कुशवाहा को उम्मीद थी कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए के सीट बंटवारे के दौरान किए गए वादे को ध्यान में रखते हुए उनके बेटे को भाजपा एमएलसी बनाएगी। हालांकि, प्रदेश के भाजपा नेताओं का कहना है कि इस बीच राज्यसभा चुनाव भी हुए। भाजपा ने अपने समर्थन से उपेंद्र कुशवाहा को दोबारा राज्यसभा भेजा, इससे समीकरण बदल गए।
सियासी गलियारों में यह भी चर्चा हुई कि दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाने के लिए भाजपा ने उपेंद्र कुशवाहा को अपनी पार्टी रालोमो का विलय करने का ऑफर दिया था। हालांकि, कुशवाहा ने इससे साफ इनकार कर दिया था।
उपेंद्र कुशवाहा के पास क्या विकल्प?
बिहार विधानसभा में अभी रालोमो के 4 विधायक हैं, जिनमें कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता शामिल हैं। अगर दीपक प्रकाश अपने पद से इस्तीफा देते हैं, तो कुशवाहा अपनी पत्नी स्नेहलता या फिर पार्टी के विधायक दल के नेता माधव आनंद को सम्राट कैबिनेट में शामिल कर सकते हैं।
दूसरी स्थिति में सासाराम से विधायक स्नेहलता अपनी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर बेटे को उपचुनाव लड़वा सकती है। पटना की बांकीपुर सीट पर अक्टूबर से पहले उपचुनाव होने वाला है। अगर स्नेहलता सीट छोड़ती हैं तो दीपक उपचुनाव लड़कर विधानसभा पहुंच सकते हैं।
इसके अलावा, इसी साल नवंबर महीने में बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक क्षेत्र की कुछ सीटें खाली हो रही हैं। दीपक प्रकाश उनमें से किसी एक सीट पर चुनाव लड़कर भी विधान परिषद पहुंच सकते हैं। हालांकि, ये बातें सिर्फ अटकलों और कयासों के आधार पर हैं। उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे के मंत्री पद को बचाने के लिए क्या फैसला लेते हैं, इस पर कुछ स्पष्ट अभी नहीं हुआ है।
लेखक के बारे में
Jayesh Jetawatजयेश जेतावत एक अनुभवी, जुझारू एवं निष्पक्ष पत्रकार हैं। बीते 10 सालों से स्थानीय मुद्दों को कवर कर रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग एवं संपादन में महारत हासिल है। बिहार में पर्यटन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। तकनीकी रूप से निपुण जयेश, तथ्यों की बारीकी से जांच कर समयसीमा के भीतर पाठकों तक सटीक खबरें एवं शोध-परक विश्लेषण पहुंचाते हैं। जनसरोकार के मुद्दे उठाना, पेशेवर नैतिकता का पालन करना, समाज एवं मानव कल्याण के प्रति जिम्मेदारी, इन्हें और भी योग्य बनाती है। भाषा पर इनकी अच्छी पकड़ है। जटिल मुद्दों को पाठकों एवं दर्शकों तक आसान शब्दों में पहुंचाना इनकी खूबी है।
जयेश जेतावत मूलरूप से मेवाड़ क्षेत्र (राजस्थान) के रहने वाले हैं। इन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से जनसंचार में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके बाद ईटीवी भारत में बतौर प्रशिक्षु समाचार संपादक के रूप में काम शुरू किया। फिर इंडिया न्यूज के डिजिटल सेक्शन में विभिन्न बीट कवर की। इसके बाद, वे2न्यूज में बतौर टीम लीडर तीन राज्यों की कमान संभाली। साल 2021 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े, तब से यहां बिहार की खबरों को कवर कर रहे हैं। जयेश ने टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव इंडिया न्यूज चैनल और सी-वोटर रिसर्च एजेंसी में इंटर्नशिप भी की। पटना से प्रकाशित मैगजीन राइजिंग मगध में समसामयिक विषयों पर इनके लेख छपते रहे हैं। समाचार लेखन के अलावा जयेश की साहित्यिक पठन एवं लेखन में रुचि है, सामाजिक मुद्दों पर कई लघु कथाएं लिख चुके हैं।


