दीपक प्रकाश का पद मार्च तक ही सेफ! आगे RLM का BJP में विलय या कुशवाहा की विदाई?

लाइव हिन्दुस्तान, पटना
Follow us on Google News
share

रालोमो अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने दीपक प्रकाश को विधान पार्षद बनवाकर सम्राट चौधरी सरकार में बेटे का मंत्री पद मार्च तक बचा लिया है। भाजपा में दल के विलय का दबाव झेल रहे कुशवाहा का रुख सात महीने बाद की राजनीति तय करेगा।

Deepak Prakash Sakshi Mishra Kushwaha
6 अगस्त को एमएलसी की शपथ लेने के बाद घर में दीपक प्रकाश का स्वागत करतीं पत्नी साक्षी मिश्रा कुशवाहा।

बिहार में नया दल बनाने और उसका दूसरे दल में विलय करने के बाद तीसरा दल बनाने वाले नेता उपेंद्र कुशवाहा ने बेटे की कुर्सी बचाने के लिए येन-केन-प्रकारेण मंत्री दीपक प्रकाश को सात महीने वाला विधान पार्षद बनवा लिया है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार की सलाह पर राज्यपाल ने एमएलसी मनोनीत कर दिया है, जिनका कार्यकाल मार्च 2027 में पूरा हो रहा है। सात महीने बाद दीपक प्रकाश को अगर मंत्री पद पर बने रहना है तो उपेंद्र कुशवाहा को फिर बीजेपी से एमएलसी की एक सीट मांगनी होगी। सूत्रों के अनुसार कुशवाहा ने फिलहाल के लिए मुसीबत टालने में कामयाबी हासिल कर ली है, लेकिन अगले सात महीने में उन्हें अपनी पार्टी आरएलएम का बीजेपी में विलय करने के ऑफर पर अपना मन बना लेना होगा। कुशवाहा का स्टैंड ही उनकी और परिवार की आगे की राजनीति तय करेगा।

उपेंद्र कुशवाहा के सामने विकट संकट है। उनकी पार्टी के चार विधायक में पत्नी स्नेहलता कुशवाहा को छोड़कर बाकी तीन विधायक एक गुट की तरह पार्टी में बने हुए हैं। नीतीश कुमार ने जब पिछली सरकार में पहली बार दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया था, तब कुछ दिन तक ऐसा माहौल बना रहा था कि रालोमो के तीन विधायक माधव आनंद, आलोक सिंह और रामेश्वर महतो पार्टी तोड़कर अब गए कि तब गए। लेकिन तब उपेंद्र कुशवाहा ने उनके बीच कुछ पद बांटकर संकट को सुलझा लिया था। लेकिन उस प्रकरण ने कुशवाहा को इशारों में समझा दिया था कि उनकी पार्टी की एकता तभी तक महफूज है, जब तक भाजपा उसे तोड़ना नहीं चाहती है।

मंत्री दीपक प्रकाश ने MLC की शपथ ली, बिहार विधान परिषद पहुंच ही गए उपेंद्र कुशवाहा के बेटे

जब बिना किसी सदन का सदस्य बने दीपक प्रकाश के दोबारा मंत्री बनने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए सम्राट चौधरी सरकार से जवाब मांग लिया, तब यह मामला कुशवाहा के पक्ष में झुका। नहीं तो जून में ही 10 सीटों के लिए हुए एमएलसी चुनाव में दीपक को भाजपा ने मौका नहीं दिया। सूत्रों का कहना है कि रालोमो का भाजपा में विलय से इनकार करने के कारण ही जून वाली लिस्ट में दीपक का नाम शामिल नहीं हो सका, जिससे उनका मंत्री बने रहना मुश्किल होता जा रहा था। सुप्रीम कोर्ट में अगस्त के अंतिम हफ्ते में सुनवाई से पहले भाजपा ने खुद के एक एमएलसी का इस्तीफा करवाकर दीपक प्रकाश को उनकी जगह सदन में भेजा है। इसका असर सरकार के जवाब में दिखेगा, जब वह कोर्ट से कहेगी कि दीपक अब सदन के सदस्य हैं।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश जैसे मंत्री अवैध, हटवाने के लिए PIL दाखिल

लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में शुरू मामला इतने से खत्म हो जाएगा या जिस दिन याचिका लगी, उसी दिन के मुताबिक जारी रहेगी, ये आगे समझ आएगा। कोर्ट में मामला जब गया था, तब दीपक विधायक या एमएलसी बने बिना छह महीने से ज्यादा समय तक मंत्री रह चुके थे। पंजाब में इसी तरह के एक मामले में कोर्ट ने वर्षों बाद फैसला देकर एक मंत्री की नियुक्ति को अवैध और असंवैधानिक बताया था, जब वो सरकार भी नहीं बची थी। ऐसा कोई फैसला दीपक प्रकाश के मामले में आगे आता है तो यह उनके साथ-साथ भाजपा के लिए भी असहज स्थिति हो सकती है। दीपक का केस बंद नहीं हुआ तो कुशवाहा पर भी दबाव बना रहेगा। मार्च से पहले विलय का दबाव बढ़ेगा और ऐसा नहीं करने पर भाजपा दीपक प्रकाश की विदाई का रास्ता खोल देगी या उपेंद्र कुशवाहा दिल्ली से ब्रेक लगवाने में फिर कामयाब होंगे, यह समय बताएगा।

Ritesh Verma

लेखक के बारे में

Ritesh Verma
रीतेश वर्मा पत्रकारिता में 25 साल से अलग-अलग भूमिका में अखबार, टीवी और डिजिटल में काम कर चुके हैं। दैनिक जागरण के साथ बिहार में 5 साल तक जिला स्तर की प्रशासनिक और क्राइम रिपोर्टिंग करने के बाद रीतेश ने आईआईएमसी, दिल्ली में दाखिला लेकर पत्रकारिता की पढ़ाई की। एक साल के अध्ययन ब्रेक के बाद रीतेश ने विराट वैभव से दोबारा काम शुरू किया। फिर दैनिक भास्कर में देश-विदेश का पेज देखा। आज समाज में पहले पन्ने पर काम किया। बीबीसी हिन्दी के साथ आउटसाइड कंट्रीब्यूटर के तौर पर जुड़े। अखबारों के बाद रीतेश ने स्टार न्यूज के जरिए टीवी मीडिया में कदम रखा। रीतेश ने टीवी चैनलों में रिसर्च डेस्क पर लंबे समय तक काम किया है और देश-दुनिया के विषयों पर तथ्यपरक जानकारी सहयोगियों को आगे इस्तेमाल के लिए मुहैया कराई है। सहारा समय और इंडिया न्यूज में भी रीतेश रिसर्च का काम करते रहे। इंडिया न्यूज की पारी के दौरान वो रिसर्च के साथ-साथ चैनल की वेब टीम के हेड बने और इनखबर न्यूज पोर्टल को बतौर संपादक शुरू किया। लाइव हिन्दुस्तान के साथ एडिटर- न्यू इनिशिएटिव के तौर पर पिछले 6 साल से जुड़े रीतेश फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार की खबरों और दोनों राज्यों की टीम को देखते हैं। और पढ़ें
लेटेस्ट Hindi News, Bihar News के साथ-साथ Patna, Muzaffarpur, Bhagalpur और बिहार के अन्य जिलों की ताज़ा खबरें और पटना का मौसम हिंदी में जानने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।
Hindi NewsBihar Newsदीपक प्रकाश का पद मार्च तक ही सेफ! आगे RLM का BJP में विलय या कुशवाहा की विदाई?