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दरभंगा

धरोहर के प्रति जागरूक हों ग्रमीण : डॉ. शिव कुमार

हिन्दुस्तान टीम,दरभंगाPublished By: Newswrap
Mon, 14 Jun 2021 07:51 PM

धरोहर के प्रति जागरूक हों ग्रमीण : डॉ. शिव कुमार

दरभंगा। महाराजाधिराज लक्ष्मीश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा की ओर से आम जनमानस में अपन धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से रविवार को जिले के मनीगाछी प्रखंड अंतर्गत भंडारिसम एवं मकरंदा में एकदिवसीय अभियान चलाया गया। संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. शिव कुमार मिश्र के नेतृत्व में कला इतिहासकार डॉ. सुशांत कुमार, क्षेत्रीय अभिलेखागार के प्रभारी पदाधिकारी डॉ. सचिन चक्रवर्ती, संग्रहालय के तकनीकी सहायक चंद्र प्रकाश के अलावा मकरंदा के युवक कुणाल कुमार मिश्र ने भंडारिसम एवं मकरंदा गांव के पुरास्थल एवं प्राचीन प्रतिमाओं का अवलोकन किया। डॉ. मिश्र ने गांव की प्राचीन मूर्तियों को चोरों से बचाने की अपील की। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से अपनी धरोहर की महत्ताओं के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि मिथिला की मूर्तियों को तस्करों से बहुत खतरा है। इसलिए इसकी सुरक्षा का पुख्ता इंतजाम होना चाहिए। अभी तक मिथिला में हरिहर की तीन ही मूर्तियां मिली हैं। इसलिए हाल में मिली यहां की हरिहर की मूर्ति दुर्लभ है। उमेश झा के घर में रखी हुई इस मूर्ति की सुरक्षा के लिए उनके परिवारजनों को आगाह किया गया। डॉ. मिश्र के अनुसार वाणेश्वरी देवी की आंखों में धातुओं को लगाना कहीं से भी उचित नहीं है। उनके अनुसार मूर्ति पर पानी, सिंदूर, दूध, दही, मिठाई, फूल आदि अन्य चढ़ाने से परहेज करना चाहिए। यह सिंहवाहिनी दुर्गा की मूर्ति करीब आठ सौ वर्ष पूर्व की है तथा मिथिला के कर्णाटवंशी राजाओं के समय में यह निर्मित हुई होगी। देवी मंदिर में पानी के अलावा अन्य चढ़ावे से मूर्ति को क्षति पहुंचाई जा रही है जिसपर विराम लगाने के लिए पुजारी प्रवीण कुमार पाठक से आग्रह किया गया। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में एक पेड़ की जड़ में रखी गई भग्न मूर्तियों पर अत्यधिक जल प्रयोग के कारण उसपर काई की मोटी परत जम गई है तथा उसमें क्षरण भी आ रहा है। काई के चलते मूर्ति की पहचान भी संभव नहीं हो सका। पुजारी ने बताया कि मंदिर के सामने कुछ दूरी पर अवस्थित एक पोखर से देवी की मूर्ति मिली थी जिसे उठाकर पूर्व में एक पेड़ के नीचे रखा गया और बाद में महाराजा लक्ष्मीश्वर सिंह की धर्मपत्नी लक्ष्मीवती देवी द्वारा मंदिर का निर्माण कराया गया। इस तरह का शिलापट्ट भी मंदिर के मुख्य द्वार के ऊपर लगा है। डॉ. मिश्र ने कहा कि मिथिला की प्रसिद्ध पंजी में भंडारिसम एवं मकरंदा का उल्लेख मूलग्राम के रूप में किया गया है जिससे स्पष्ट है कि कर्णाट काल अर्थात करीब एक हजार साल पहले यहां एक सुव्यवस्थित बस्ती रही होगी। यहां के टीले से जो प्राचीन मूर्तियों के अवशेषों के अलावा मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े एवं पुराने ईंट मिल रहे हैं इससे संकेत मिलता है कि यह एक महत्वपूर्ण पुरास्थल है। इसकी सुरक्षा के लिए राज्य सरकार द्वारा इसे संरक्षित स्मारकों की सूची में सम्मिलित कर उत्खनन, अनुसंधान, सुरक्षा एवं संरक्षण की व्यवस्था किया जाना चाहिए। वर्तमान समय में जो अवैज्ञानिक ढंग से मिट्टी खुदाई की जा रही है इसके चलते प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर नष्ट हो रही हैं। ग्रामीणों से आग्रह किया गया कि इस पुरास्थल की रक्षा करें तथा मिट्टी खुदाई पर रोक लगाएं। वरिष्ठ नागरिक रजनीकांत झा ने संग्रहालय की टीम का स्वागत किया तथा हरिहर मूर्ति को राधा गोविन्द मंदिर में स्थापित करने का सुझाव दिया।

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