वैदिक ज्ञान का रहा है अंतरराष्ट्रीय प्रभाव : प्रो. अभिराज

वैदिक ज्ञान का रहा है अंतरराष्ट्रीय प्रभाव : प्रो. अभिराज

संक्षेप:

दरभंगा में कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि और महर्षि सांदीपनि वेद विद्यापीठ द्वारा वैदिक मंत्रों के दार्शनिक विश्लेषण पर त्रिदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विद्वानों ने वैदिक ज्ञान की वैज्ञानिकता और प्रमाणिकता पर चर्चा की। कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने सभी प्राणियों के लिए सम्भाव पर बल दिया।

Dec 13, 2025 10:34 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, दरभंगा
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दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि के स्नातकोत्तर दर्शन विभाग तथा महर्षि सांदीपनि वेद विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में वैदिक मंत्रों के दार्शनिक विश्लेषण विषय पर आयोजित त्रिदिवसीय अखिल भारतीय वैदिक संगोष्ठी शनिवार को संपन्न हो गई। देशभर से जुटे विद्वानों ने तीन दिनों तक खूब मंथन किया और वैदिक मंत्रों के व्यवहारिक पक्षों को उजागर करते हुए उसकी प्रमाणिकताओं को भी सिद्ध किया। समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने सभी प्राणियों के लिए सम्भाव पर बल दिया। मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति पद्मश्री प्रो. अभिराज राजेन्द्र मिश्र ने वैदिक ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिकता, प्रामाणिकता एवं वैश्विक प्रभाव पर विस्तार से प्रकाश डाला।

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उन्होंने कहा कि विश्व की विभिन्न परम्पराओं के निर्माण में वेदों से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है जो भारतीय दर्शन की सार्वभौमिकता को दर्शाता है। प्रो. सुरेश्वर झा ने वेद को स्वत: प्रमाण के रूप में परिभाषित करते हुए वैदिक मंत्रों का दार्शनिक विश्लेषण किया। मानपुर, गया के डॉ. संजय कुमार उर्फ सुदर्शनाचार्य महाराज ने वैदिक सुक्तियों को परिभाषित किया। बीएचयू के पूर्व संकायाध्यक्ष प्रो. कमलेश कुमार झा ने महापुरुषों के दर्शन में योगदान का वर्णन किया। पूर्व प्रतिकुलपति प्रो. सिद्धार्थ शंकर सिंह ने कहा कि ज्ञान की महिमा को समाज तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है। प्रो.जयशंकर झा ने वैदिक मंत्रों का लौकिक जीवन में उपयोगिता पर बल दिया। अतिथियों का स्वागत कुलसचिव प्रो. ब्रजेशपति त्रिपाठी ने किया। संचालन डॉ. शशिकांत तिवारी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुधीर कुमार ने किया। कार्यक्रम में डॉ. धीरज कुमार पाण्डेय, डॉ. सुधीर कुमार, प्रो. दिलीप कुमार झा, प्रो. दयानाथ झा, प्रो. पुरेंद्र वारिक, पीआरओ निशिकांत, डॉ. घनश्याम मिश्र, डॉ. सुनील कुमार झा, प्रो. विनय मिश्र, डॉ. ध्रुव मिश्र, डॉ. रामसेवक झा, डॉ. रितेश चतुर्वेदी, डॉ. शम्भु शरण तिवारी, डॉ. निशा, डॉ. सविता आर्या, डॉ. माया, डॉ. यदुवीर स्वरूप शास्त्री, डॉ. छविलाल, डॉ. अवधेश श्रोत्रिय, डॉ. संतोष तिवारी, डॉ. विभव कुमार झा सहित कई प्राध्यापक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।