
पोखरों केसौंदर्यीकरण की प्रक्रिया पर जताई चिंता
दरभंगा में तालाब बचाओ अभियान के सदस्यों ने हराही, दिग्घी और गंगासागर पोखरों का निरीक्षण किया। अधिवक्ताओं ने तालाबों की बदहाली पर चिंता जताते हुए इसे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि इन तालाबों का सौंदर्यीकरण वेटलैंड अथॉरिटी की जिम्मेदारी है और एक सप्ताह में सर्वोच्च न्यायालय में वाद दायर करेंगे।
दरभंगा। तालाब बचाओ अभियान के सदस्यों के साथ सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता कमलेश कुमार मिश्र, कार्पस जूरिस्ट इंडिया लॉयर्स टीम की श्वेता प्रिया और थोप्पानी संजीव ने शुक्रवार को हराही, दिग्घी व गंगासागर पोखरों का निरीक्षण किया। तीनों अधिवक्ताओं ने तालाबों की बदहाली पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने हराही पोखर को मिट्टी से भरने को मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करार दिया और कहा कि यह न्यायालय आदेश का उल्लंघन है। उन्होंने तीनों पोखरों की ऐतिहासिकता और सांस्कृतिक महत्व की जानकारी शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं से प्राप्त की। उन्होंने बताया कि झील, तालाब या वेटलैंड्स के साथ सौंदर्यीकरण के नाम पर मनमानी नहीं की जा सकती है।
इसके लिए स्पष्ट नियम-कानून और न्यायालयों के आदेश हैं। उन्होंने कहा कि दरभंगा के इन तीनों तालाबों की स्थिति को लेकर एक सप्ताह के भीतर सर्वोच्च न्यायलय में वाद दायर करेंगे। उन्होंने बताया कि हराही, दिग्घी और गंगासागर झील इसरो, हैदराबाद द्वारा तैयार किये गये नेशनल एटलस में शामिल हैं। साथ ही बिहार स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी की सूची में दर्ज हैं। वेटलैंड रूल्स 2017 के अनुसार इन तालाबों के सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी वेटलैंड अथॉरिटी, बिहार को है। फिर भी इसका उल्लंघन कर एजेंसी से निर्माण कार्य कराया जा रहा है। मौके पर डॉ. विद्यानाथ झा, डॉ. प्रेम मोहन मिश्र, प्रो. शारदा नंद चौधरी, डॉ. अशोक कुमार सिंह, अजित कुमार मिश्र, नारायण जी चौधरी, तसीम नवाब, विजय, जय शंकर प्रसाद गुप्ता, इंदिरा कुमारी, नाजिया, सईदा, आरके दत्ता, अभिषेक, प्रकाश बन्धु, अमरजीत मंडल आदि मौजूद थे।

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