आध्यात्मिक चेतना के वैश्विक प्रतिनिधि थे विवेकानंद
दरभंगा में लनामिवि के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में स्वामी विवेकानंद के वसुधैव कुटुंबकम चिंतन पर संगोष्ठी हुई। डॉ. अमीर अली खान ने स्वामी विवेकानंद को भारतीय आध्यात्मिक चेतना का वैश्विक प्रतिनिधि बताया। मुख्य वक्ता प्रो. अरविंद कुमार ने विवेकानंद के विचारों को युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत माना।
दरभंगा। लनामिवि के स्नातकोत्तर इतिहास विभाग में स्वामी विवेकानंद के वसुधैव कुटुंबकम चिंतन विषय पर संगोष्ठी का आयोजन मंगलवार को हुआ। विषय प्रवेश करते हुए डॉ. अमीर अली खान ने विकसित भारत की संकल्पना पर चर्चा करते हुए स्वामी विवेकानंद की चिंतन परंपरा को राष्ट्र निर्माण की वैचारिक आधारशिला माना। उन्होंने वेदांत और योग दर्शन पर प्रकाश डालते हुए विवेकानंद को भारतीय आध्यात्मिक चेतना का वैश्विक प्रतिनिधि बताया। मुख्य वक्ता पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. अरविंद कुमार ने स्वामी विवेकानंद को राष्ट्रभक्त, युवाओं के प्रेरणास्रोत, साधक और संन्यासी के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि सन्यास की अवधारणा का उल्लेख उपनिषदों, विशेषकर कठोपनिषद में मिलता है, जिससे संपूर्ण पृथ्वी और संसार को समष्टि रुप से देखने की दृष्टि मिलती है।
कहा कि विवेकानंद का वसुधैव कुटुंबकम चिंतन वैश्विक स्तर पर भारतीय दर्शन की प्रतिष्ठा को स्थापित करता है। विभागाध्यक्ष प्रो. संजय झा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद को केवल पाठ्यक्रमों में सीमित न करें, बल्कि उनके विचारों को अपने जीवन और आचरण में उतारें। उनका चिंतन व दर्शन व्यक्ति, समाज व संपूर्ण सृष्टि को जोड़ने वाला है। डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीष कुमार ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ज्योति प्रभा ने किया। इस अवसर पर प्रो. नैयर आज़म, डॉ. अमीर अली खान, डॉ. अमिताभ कुमार, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. ज्योति प्रभा, मुकेश झा सहित कई शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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