
नदियों के सूखने से खेती महंगी, नाविकों का छिना रोजगार
दरभंगा जिले की नदियां जैसे कमला, जीवछ, और बागमती का जल प्रवाह अवरुद्ध हो गया है, जिससे कृषि और रोजगार पर संकट आ गया है। किसानों को पटवन में समस्या हो रही है, और मछुआरों की आमदनी घट रही है। अवैध खनन और प्रदूषण ने भी हालात को गंभीर बना दिया है।
दरभंगा। जिले की जीवनदायिनी व कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाली नदियां दम तोड़ रही हैं। कमला, जीवछ, दरभंगा बागमती, खिरोई, गोरहो या चनहा धार आदि नदियों का बहाव अवरुद्ध है। नदी जल सूखने से ‘कोसी मैया’ व ‘कमला बहिना’ कहकर पूजा-अर्चना करने वाले आस्थावान लोग मायूस हैं। पटवन की समस्या उन्नत होने से किसानी मुश्किल दौर में है। धान, गन्ना, गेहूं जैसी परंपरागत खेती से किसान कन्नी काटते हैं। नदियों का अविरल प्रवाह खत्म होने से परंपरागत पेशेवरों का रोजगार संकट में है। नाविकों के नाव बेकार बन चुके हैं और काम नहीं मिलने से जीवन यापन कठिन बन चुका है।
लोकल मछलियों के उत्पादन में गिरावट आने से मछुआरे और पानी की दिक्कत से धोबी समाज के लोगों की कमाई घट गई है। वहीं, नदियों की पेटी (तलहटी) में अवैध खनन, अतिक्रमण आदि से प्रदूषण, पेयजल की समस्याएं, आर्सेनिक वाटर से बीमारी जैसी समस्याएं पसर रही हैं। पर्यावरणविद इसे भयावह स्थिति मानते हैं, जबकि पुराने किसान, मछुआरे, नाविक आदि सुनहरे पुराने दिनों को याद करते हैं। मनीगाछी प्रखंड के बलौर के किसान बैकुंठ कुमार झा बताते हैं कि कमला नदी का बेसिन क्षेत्र आर्थिक तौर पर बेहद समृद्ध रहा है। गन्ना उत्पादन के चलते इस क्षेत्र में सकरी, रैयाम, लोहट जैसी शुगर फैक्ट्री, लेदर आदि उद्योगों का जाल बिछा था। उन्होंने बताया कि तटबंधों में नदियों के कैद होने के बाद कमला की प्राकृतिक धाराएं सूख गईं। खेतों में पटवन की समस्या खड़ी हुई और गन्ना उत्पादन में गिरावट आने से उद्योग व समृद्ध किसानी समाप्त हो गई। उन्होंने बताया कि वर्तमान में दरभंगा हवाई अड्डे के पास से गुजरने वाली कमला धार एवं बाघ मोड़ के पास से गुजरने वाले बरसाती नाले का मुहाना बंद है। इससे त्रिमुहानी घाट संगम स्थल जाने वाला प्रवाह बंद है। उन्होंने बताया कि नदी की पेटी में दरभंगा नगर निगम का कचरा डंप हो रहा है। साथ ही जगह-जगह अतिक्रमण है। इसके चलते दरभंगा सदर, मनीगाछी, बेनीपुर आदि प्रखंडों के सैकड़ों किसानों को पटवन में समस्या हो रही है। लनामिवि के शोधार्थी डॉ. मुरारी कुमार झा बताते हैं कि करेह नदी से जुड़ी चनहा धार का वजूद अतिक्रमण से खत्म हो गया है। इससे हायाघाट, बहेड़ी आदि प्रखंडों के किसान परेशान हैं। उन्होंने बताया कि पुराने समय में यह दरभंगा के ग्रामीण क्षेत्रों से शहर के विभिन्न भागों में जाने का जलमार्ग रहा है। वर्तमान में भी इसका वजूद है, पर व्यापार खत्म हो चुका है। नियमित जल प्रवाह के अभाव से नदियां सूख गई हैं। भू और खनन माफियाओं का नदियों पर कब्जा है और किसान, मछुआरे, धोबी, नाविक आदि जैसे परंपरागत पेशेवर मुश्किल में हैं।

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